अमेरिका और रूस के बीच जारी तनाव के माहौल में अब दोनों देशों के बीच मौजूद आखिरी परमाणु संधि भी समाप्ति की ओर बढ़ रही है। यूक्रेन युद्ध के बाद से दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे खराब दौर में हैं और ऐसे समय में न्यूक्लियर हथियारों को सीमित करने वाली ‘न्यू स्टार्ट’ (New START) संधि के खत्म होने की आशंका ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संधि समाप्त हो जाती है, तो एक बार फिर वैश्विक परमाणु हथियारों की दौड़ शुरू हो सकती है।
क्या है स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी
परमाणु हथियारों के अप्रसार को लेकर अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच 1963 में पहली बार एक समझौता हुआ था, जिसे समय-समय पर आगे बढ़ाया गया। वर्ष 2010 में साइन की गई नई स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी, जिसे ‘न्यू स्टार्ट’ कहा जाता है, 6 फरवरी को समाप्त होने जा रही है। इस संधि के तहत अमेरिका और रूस को जमीन, हवा और समुद्र में नए परमाणु परीक्षण करने से रोका गया है।
यदि यह संधि समाप्त हो जाती है, तो करीब 50 वर्षों में पहली बार ऐसा होगा जब दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियां बिना किसी औपचारिक नियंत्रण के अपने परमाणु हथियार कार्यक्रमों को आगे बढ़ा सकेंगी। वर्तमान में दुनिया के लगभग 87 प्रतिशत परमाणु वॉरहेड अमेरिका और रूस के पास हैं। रूस इस सूची में सबसे ऊपर है, जिसके पास 5,000 से अधिक परमाणु हथियार बताए जाते हैं।
बढ़ सकता है परमाणु खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, न्यू स्टार्ट के खत्म होने से दोनों देश सीमाओं पर आक्रामक ढंग से परमाणु हथियारों की तैनाती कर सकते हैं और नए परमाणु परीक्षणों की संभावना भी बढ़ जाएगी। यदि अमेरिका और रूस दोबारा परमाणु हथियारों की दौड़ में उतरते हैं, तो अन्य देशों को इससे दूर रखना बेहद कठिन हो जाएगा।
संधि के विस्तार की गुंजाइश नहीं
साल 2021 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस संधि को पांच साल के लिए बढ़ाया था। हालांकि, संधि के प्रावधानों के अनुसार इसे केवल एक बार ही बढ़ाया जा सकता था, इसलिए अब इसके आगे विस्तार की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
ट्रंप का सख्त रुख
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी किसी नई परमाणु संधि के प्रति कोई खास रुचि नहीं दिखाई है। वह सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि अमेरिका को नए परमाणु परीक्षण करने चाहिए। हाल ही में एक साक्षात्कार में ट्रंप ने 2010 के न्यू स्टार्ट समझौते पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर यह खत्म हो जाता है तो हो जाने दें, हम एक बेहतर समझौता करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि चीन के पास दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती रणनीतिक परमाणु शक्ति है और न्यू स्टार्ट की जगह आने वाली किसी भी नई संधि में चीन को शामिल किया जाना चाहिए।
परमाणु संधियों का इतिहास
पहला स्टार्ट समझौता 1991 में साइन किया गया था, जिसके बाद रणनीतिक परमाणु वॉरहेड्स की संख्या में कमी आई। 1993 में स्टार्ट-II का उद्देश्य परमाणु हथियारों में और अधिक कटौती करना था, जिसमें इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों पर मल्टीपल वॉरहेड्स (MIRVs) पर प्रतिबंध और रूसी SS-18 मिसाइलों को खत्म करना शामिल था। हालांकि अमेरिका के एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल (ABM) संधि से हटने के कारण यह पूरी तरह लागू नहीं हो सका और रूस ने 2002 में इसे औपचारिक रूप से खारिज कर दिया। अंततः 2010 में न्यू स्टार्ट-3 ने इसकी जगह ली।
भविष्य को लेकर अनिश्चितता
फिलहाल अमेरिका और रूस दोनों ही यूक्रेन युद्ध पर केंद्रित हैं और न्यू स्टार्ट को लेकर नए सिरे से कोई बातचीत नहीं हो रही है। सितंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने संधि को 12 महीने के लिए और बढ़ाने का सुझाव दिया था, साथ ही भविष्य की वार्ताओं में ब्रिटेन और फ्रांस के परमाणु हथियारों को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि ब्रिटेन और फ्रांस ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और अमेरिका की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
ऐसे में न्यू स्टार्ट के समाप्त होने के साथ ही दुनिया एक बार फिर अनियंत्रित परमाणु प्रतिस्पर्धा के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है।
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