लखपति दीदी बनीं अनीता देवी: सरकारी योजनाओं और मेहनत से बदली जिंदगी, 4400 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

अमरोहा। यह कहानी केवल एक महिला की सफलता की नहीं, बल्कि उस बदलाव की मिसाल है जो सरकारी योजनाओं, सामूहिक प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति से संभव हुआ है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के विकास खंड गजरौला के ग्राम पंचायत सलेमपुर गोसाईं की रहने वाली अनीता देवी आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के कारण अनीता देवी अपने परिवार की बुनियादी जरूरतें भी मुश्किल से पूरी कर पाती थीं। वह अपने पति के साथ मजदूरी कर किसी तरह घर चलाती थीं। लेकिन आज वही अनीता सालाना लाखों की आय अर्जित कर रही हैं और उनके समूह से जुड़ी करीब 4400 महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।

सरकारी योजनाओं से मिली नई दिशा

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद अनीता देवी की जिंदगी ने नई दिशा ली। शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ने पर उन्हें आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास मिला। वर्ष 2021 में सामुदायिक निवेश निधि से उन्हें 1,10,000 रुपये मिले, जिससे उनके व्यवसाय की नींव मजबूत हुई।

इसके बाद वर्ष 2023 में 15 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड, 2024 में 3 लाख रुपये और 2025 में 4 लाख रुपये का सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) मिला। इन संसाधनों ने उनके व्यवसाय को विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई।

सिलाई से शुरू किया सफर, बना सफल कारोबार

अनीता देवी ने अपने घर से सिलाई का काम शुरू किया और धीरे-धीरे इसे व्यवसाय में बदल दिया। उन्होंने कपड़े तैयार कर बेचने शुरू किए। कोरोना काल में उनके समूह ने मास्क और अन्य उत्पाद बनाकर अच्छा काम किया, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई।

आज सलेमपुर में अनीता 27 स्वयं सहायता समूहों का संचालन कर रही हैं। दिसंबर 2023 में उन्होंने ‘शक्ति ट्रेडर्स’ नाम से किराना दुकान भी शुरू की, जिसे उनके पति और बेटा संभालते हैं।

हर महीने 40-45 हजार की आमदनी

वर्तमान में अनीता देवी की मासिक आय 40,000 से 45,000 रुपये तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा वह समय मिलने पर कॉस्मेटिक उत्पादों की बिक्री भी करती हैं, जिससे उनकी आय के स्रोत और मजबूत हुए हैं।

गांव की प्रेरणा बनीं अनीता

आज अनीता देवी न केवल अपने परिवार का सहारा हैं, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन, अवसर और मेहनत से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है।

अनीता देवी अपनी सफलता का श्रेय सरकारी योजनाओं और अपने समूह को देते हुए कहती हैं कि आत्मनिर्भरता ही सच्चा सम्मान दिलाती है।

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