अमेरिका की 2026 राष्ट्रीय रक्षा रणनीति: सैन्य शक्ति के दम पर शांति स्थापित करने पर जोर

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका की विदेश और रक्षा नीति अधिक आक्रामक और स्पष्ट रुख अपनाती दिख रही है। ईरान पर सख्त रुख हो या वेनेजुएला के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी—ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर ताकत के इस्तेमाल से पीछे नहीं हटेगा। इसी सोच को अमेरिका की 2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (United States National Defense Strategy) में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है, जिसमें सैन्य शक्ति के माध्यम से शांति कायम करने की नीति अपनाने की बात कही गई है।

राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में क्या कहा गया है

रणनीति के अनुसार, अमेरिका अपने संभावित विरोधियों के साथ सम्मानजनक और टिकाऊ शांति चाहता है। यह शांति लगातार युद्ध या टकराव से नहीं, बल्कि मजबूत सैन्य क्षमता और व्यावहारिक कूटनीति के जरिए हासिल की जानी चाहिए। दस्तावेज में कहा गया है कि अमेरिकी सेना की ताकत का उद्देश्य शांति बनाए रखना है, ताकि अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और समृद्धि सुनिश्चित हो सके।

रणनीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि अन्य देश अपनी मांगें “उचित और सीमित” रखते हैं, तो उनके हितों का सम्मान किया जा सकता है। यह दृष्टिकोण उन पुरानी नीतियों से अलग बताया गया है, जिनमें लंबे युद्ध, सत्ता परिवर्तन और विदेशी धरती पर वैचारिक अभियानों पर जोर दिया जाता था।

पुरानी नीतियों की आलोचना

2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में शीत युद्ध के बाद अपनाई गई कुछ पुरानी नीतियों की आलोचना की गई है। कहा गया है कि वे नीतियां अमेरिका के वास्तविक हितों से मेल नहीं खाती थीं। नई रणनीति के तहत खतरों का आकलन उनकी गंभीरता और अमेरिका पर पड़ने वाले सीधे प्रभाव के आधार पर किया जाएगा।

दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि अमेरिका दुनिया की हर समस्या को हल करने की जिम्मेदारी नहीं लेता और न ही विदेशों में मौजूद हर खतरे को अमेरिकी मातृभूमि के लिए समान रूप से गंभीर मानता है। साथ ही, अमेरिका जबरन अपनी जीवनशैली या व्यवस्था अन्य देशों पर थोपने की नीति को भी खारिज करता है।

सैन्य शक्ति से प्रभावी कूटनीति

रणनीति में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कूटनीति को प्रभावी बनाने के लिए सैन्य शक्ति आवश्यक है। सेना को इस स्थिति में होना चाहिए कि वह विरोधियों को रोक सके और जरूरत पड़ने पर अमेरिका के हितों के खिलाफ सबसे बड़े खतरों को परास्त कर सके। यदि सेना मजबूत बनी रहती है, तो राष्ट्रपति के पास निर्णायक कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता रहती है।

दस्तावेज में यह चेतावनी भी दी गई है कि केवल संयम और इच्छा से शांति नहीं मिलती। शांति की कामना और उसे हासिल करना—दोनों अलग बातें हैं। यदि शांति के प्रयास असफल होते हैं, तो अमेरिकी सेना देश के युद्ध लड़ने और जीतने के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी।

‘अमेरिका फर्स्ट’ रणनीति

इस रणनीति के केंद्र में “अमेरिकी हित सबसे पहले” का सिद्धांत रखा गया है। इसमें कहा गया है कि खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही, सहयोगी और साझेदार देशों से अपेक्षा की गई है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी लें। यह अमेरिका को संतुष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि उनके स्वयं के हित में बताया गया है।

कुल मिलाकर, अमेरिका की 2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति यह संदेश देती है कि देश शांति चाहता है, लेकिन वह शांति ताकत, तैयारी और स्पष्ट प्राथमिकताओं के आधार पर ही सुनिश्चित की जाएगी।

 

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