- रिपोर्ट: शाहबाज़ खां
रामपुर। रामपुर के जिला महिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में भर्ती कई गर्भवती महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें भर्ती किए जाने के बाद भी समय पर डॉक्टर और स्टाफ का सहयोग नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महिलाओं का कहना है कि उन्हें पिछली रात से अस्पताल में भर्ती किया गया है, लेकिन लंबे समय तक न तो डॉक्टर जांच के लिए पहुंचे और न ही अस्पताल का स्टाफ उनकी देखभाल के लिए आया। उनका आरोप है कि इलाज में हो रही देरी के कारण वे शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान हैं। कुछ महिलाओं ने यह भी दावा किया कि उन्हें समय पर भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गईं।
अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिला महिला चिकित्सालय में मरीजों को भर्ती तो कर लिया जाता है, लेकिन बाद में उनकी नियमित निगरानी और उपचार में लापरवाही बरती जाती है।
इस पूरे मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. दीपा सिंह की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, अस्पताल प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्थानीय समाचार पोर्टल खबरें जंक्शन की टीम ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान भर्ती गर्भवती महिलाओं ने अपनी समस्याएं और अस्पताल में कथित अव्यवस्थाओं की जानकारी साझा की।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक इस मामले का संज्ञान लेकर जांच कराते हैं या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
नोट: यह खबर अस्पताल में भर्ती महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
