AIM-120 AMRAAM: पाकिस्तान को घातक मिसाइल दे रहा अमेरिका, भारत के लिए क्यों है चिंता की बात

अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में हाल के दिनों में आई मामूली नर्माहट के बाद अब एक बड़ा कदम सामने आया है। अमेरिका ने पाकिस्तान को AIM-120 AMRAAM मिसाइलों की आपूर्ति करने का फैसला किया है। इस सौदे के बाद दक्षिण एशिया में सुरक्षा संतुलन पर नई बहस छिड़ गई है। यह मिसाइलें पाकिस्तान वायुसेना के F-16 लड़ाकू विमानों में लगाई जाएंगी, जिससे उसकी वायु-शक्ति में निर्णायक बढ़ोतरी होने की संभावना है।

खुद ही लक्ष्य को लॉक कर करती है हमला

AIM-120 AMRAAM एक अत्याधुनिक “फायर-एंड-फॉरगेट” (Fire-and-Forget) मिसाइल है। इसका मतलब है कि एक बार मिसाइल लॉन्च हो जाने के बाद यह स्वयं लक्ष्य को ट्रैक कर हमला करती है। इससे पायलट को अन्य रणनीतिक कार्यों पर ध्यान देने की सुविधा मिलती है।

AIM-120 AMRAAM की खासियतें

1980 के दशक में विकसित AIM-120 मिसाइल, AIM-7 स्पैरो की जगह लाई गई थी। पाकिस्तान को जो संस्करण दिया जा रहा है, वह C8 (एक्सपोर्ट-फ्रेंडली) वेरिएंट बताया जा रहा है। यह GPS गाइडेंस, बेहतर जैम-रेसिस्टेंस और दो-तरफा डेटालिंक जैसी उन्नत तकनीकों से लैस है।

छोटी मगर घातक मिसाइल

यह मिसाइल लगभग 3.5 से 3.7 मीटर लंबी और लगभग 200 किलोग्राम वजनी है। ठोस ईंधन से चलने वाली यह मिसाइल उच्च सुपरसोनिक गति से उड़ान भरती है। इसकी मारक क्षमता 50 से 100 किलोमीटर तक मानी जाती है, यानी यह विजुअल रेंज से बाहर (Beyond Visual Range) के लक्ष्यों को भी नष्ट कर सकती है।

लक्ष्य को भेदने में सक्षम

इस मिसाइल में प्रारंभिक इनर्शियल नेविगेशन, मिड-कोर्स डेटालिंक अपडेट और अंतिम चरण में सक्रिय रडार गाइडेंस का संयोजन होता है। इसका वॉरहेड हाई-एक्सप्लोसिव-फ्रैगमेंटेशन प्रकार का है, जो हवाई लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से नष्ट करने में सक्षम है।

F-16 में इंटीग्रेशन से बढ़ेगी क्षमता

AIM-120 दुनिया के 40 से अधिक देशों की वायुसेनाओं में सक्रिय है। पाकिस्तान के F-16 ब्लॉक विमानों पर इसे पहले से फिट किया जा सकता है। इसके जुड़ने से पाकिस्तान की हवाई टकराव क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भारत के लिए क्यों चिंता की बात

भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में यह सौदा चिंता का विषय है क्योंकि लंबी दूरी पर लक्ष्य को नष्ट करने की यह क्षमता भारत की वायु श्रेष्ठता को चुनौती दे सकती है। यह मिसाइल भारतीय सुखोई-30, राफेल या तेजस जैसे विमानों को दूर से ही लॉक कर निशाना बना सकती है।

भारत की रणनीति क्या हो

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपने एयर-डिफेंस नेटवर्क को और मजबूत करने की जरूरत है। स्वदेशी Astra मिसाइल, राफेल और तेजस विमानों के उन्नत संस्करण, तथा S-400 और आकाश जैसी प्रणालियों की तैनाती से इस चुनौती का मुकाबला किया जा सकता है।

सौदे के रणनीतिक मायने

यह सौदा अमेरिका की रणनीतिक “बैलेंसिंग पॉलिसी” को दर्शाता है — यानी वह किस देश को कब, किस तकनीक की अनुमति देता है। इस फैसले का वास्तविक प्रभाव तब स्पष्ट होगा जब मिसाइलों की डिलीवरी और इंस्टॉलेशन पूरा हो जाएगा।

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