आगरा का पेठा दुनियाभर में अपनी खास पहचान रखता है। ताजमहल देखने आने वाले पर्यटक यहां से पेठा जरूर खरीदते हैं। करीब 500 करोड़ रुपये का उद्योग बन चुका यह कारोबार अब संकट में है। सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल की खूबसूरती और पर्यावरण बचाने के लिए इस उद्योग को आगरा से बाहर ले जाने के आदेश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्यों?
ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) के अंदर चल रही पेठा फैक्ट्रियां स्थानांतरित की जाएं। यह इलाका 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे ऐतिहासिक स्मारक शामिल हैं।
5000 लोगों की नौकरी पर संकट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेठा उद्योग को ट्रांसफर करने से लगभग 5,000 लोगों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। ये लोग पीढ़ियों से इस कारोबार से जुड़े हैं।
तीन महीने का समय
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि पेठा उद्योग को TTZ से बाहर ले जाने की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी की जाए।
ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा पेठा
पेठा न सिर्फ मिठाई बल्कि आगरा की पहचान है। कहा जाता है कि इसका उद्भव मुगल काल में हुआ था। माना जाता है कि शाहजहां ने ताजमहल का निर्माण करने वाले मजदूरों को ताकत देने के लिए यह मिठाई खिलाई थी।
500 करोड़ की इंडस्ट्री पर संकट
आगरा में रोज़ाना लगभग 25 किस्मों के करीब 1,000 क्विंटल पेठे का उत्पादन होता है। अधिकारियों के अनुसार, यह कारोबार लगभग 500 करोड़ रुपये का है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या इस फैसले से आगरा की यह ऐतिहासिक और आर्थिक पहचान कमजोर होगी?
