महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव के बाद एकनाथ शिंदे का बड़ा दावा: मुंबई मेयर महायुति से ही होगा

मुंबई। महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव संपन्न होने के बाद अब मेयर पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच उप-मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मुंबई का मेयर महायुति से ही होगा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महायुति सत्ता या कुर्सी के लालच में नहीं, बल्कि विकास के उद्देश्य से एकजुट है।

एकनाथ शिंदे ने कहा कि विपक्ष की राजनीति एक-दूसरे को गिराने की है, जबकि महायुति स्थिर और विकासशील नेतृत्व देने में विश्वास रखती है। उनके अनुसार, मुंबई जैसे बड़े महानगर को मजबूत प्रशासन और विकासोन्मुखी सोच की जरूरत है, जिसे महायुति ही पूरा कर सकती है।

राज ठाकरे के साथ गठबंधन पर खुलकर बोले

कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ गठबंधन को लेकर भी शिंदे ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि KDMC में महायुति का ही गठबंधन है और मनसे विकास के मुद्दे पर उनके साथ आई है। शिंदे ने जोर देते हुए कहा कि राजनीति से ऊपर जनता का हित और शहर का विकास होना चाहिए। जहां विकास का सवाल होगा, वहां साथ आना जरूरी है।

बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर भावुक हुए शिंदे

शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर एकनाथ शिंदे भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि “गर्व से कहो हम हिंदू हैं” कहने का साहस बालासाहेब ठाकरे ने ही दिया। शिंदे ने बताया कि एक साधारण शाखा प्रमुख से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर बालासाहेब की विचारधारा से प्रेरित रहा है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की जाएगी।

संजय राउत और ठाकरे बंधुओं पर तीखा हमला

एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत पर तंज कसते हुए कहा कि राउत को उनसे बहुत प्रेम है और उन्हें सपनों में भी वही दिखाई देते हैं। उन्होंने 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को बालासाहेब ठाकरे की इच्छा के अनुरूप बताया और कहा कि बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन अटल बिहारी वाजपेयी के समय से चला आ रहा है।

वहीं, राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए शिंदे ने कहा कि मराठी मानुष उनके कारण मुंबई से बाहर गया, जबकि उनकी सरकार मराठी लोगों को वापस मुंबई में बसाने का काम करेगी। उनके इस बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि आने वाले चुनावों में मराठी अस्मिता और विकास प्रमुख मुद्दे होंगे।

 

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