रामपुर में 40 वर्ष बाद हटा जिला गन्ना कार्यालय सिविल लाइंस के रोड से कब्जा , 40-50 दुकानों के निर्माण को कराया गया ध्वस्त
सिविल लाइंस का मुख्य मार्ग हुआ कब्जा मुक्त, वर्षों की ट्रैफिक समस्या का हुआ निदान, मुख्य मार्ग से ही दिखने लगा जिला गन्ना कार्यालय, पहले आवागमन के लिए 8 फीट का था गेट
रामपुर शहर में सिविल लाइन क्षेत्र में शौकत अली मार्ग पर गन्ना विभाग की जमीन पर अस्थाई रूप से रोड पटरी पर बनाई गई दुकानों को रामपुर सिविल न्यायालय के आदेश के उपरांत अब प्रशासनिक स्तर से ध्वस्त करा दिया गया है। सिविल न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए मौके पर मौजूद नगर पालिका टीम द्वारा की जा रही कार्यवाही का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी जोगिंदर सिंह और पुलिस अधीक्षक विद्यासागर मिश्र भी मौके पर पहुंचे।
जिलाधिकारी ने मीडिया प्रतिनिधियों से बात करते हुए बताया कि करीब 40 से 45 वर्ष पहले बनाई गई इन दुकानों को ध्वस्त करने के लिए सिविल न्यायालय द्वारा आदेश दिए गए थे, जिसके परिणाम स्वरूप दुकानें ध्वस्त करा दी गई हैं। शहर में इस मार्ग से आवागमन को दुरुस्त बनाए रखने के लिए अब मार्ग का चौड़ीकरण कराया जाएगा जिससे लोगों को जाम की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। ध्यातव्य है कि कुछ समय पूर्व नगर पालिका द्वारा इन दुकानों को जनहित में हटाए जाने की कार्यवाही प्रारंभ की गई थी जिसपर दुकानदारों ने सिविल न्यायालय में वाद दायर किया था।
न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान 11 अप्रैल को नगर पालिका के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मानवीय आधार पर दुकानों को खाली करने के लिए 15 दिवस का समय प्रदान किया था और दुकानदारों को निर्देशित किया था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी दुकानों का सामान हटा लें तथा नगर पालिका को कब्जा प्राप्त करा दें। इस के बाद दुकानदारों ने जिला न्यायालय में अपील की थी। जिला न्यायालय स्तर से अपील को खारिज करते हुए सिविल न्यायालय के आदेश की पुष्टि करते हुए 27 अप्रैल की सांय तक दुकानदारों को अपना कब्जा हटाने के लिए निर्देशित किया गया था।
जिलाधिकारी ने बताया कि शहर का सुव्यवस्थित एवं सुनियोजित विकास तथा आमजन की सुविधा एवं सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासनिक स्तर से ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्र तक अवैध निर्माण, अवैध कब्जे एवं अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है और नियमित रूप से मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
