- रिपोर्ट: शिवेंदु श्रीवास्तव
सोनभद्र।घोरावल तहसील सभागार में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में उपजिलाधिकारी आशीष कुमार त्रिपाठी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोरावल के अधीक्षक, खंड विकास कार्यालयों के प्रतिनिधि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान प्रस्तुतीकरण के माध्यम से फाइलेरिया रोग के कारणों, इसके दुष्प्रभावों, वर्तमान इलाज की स्थिति तथा समाज पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि फाइलेरिया एक कृमि जनित रोग है, जिसके लक्षण सामने आने के बाद इसका प्रभावी इलाज संभव नहीं होता। ऐसे में बचाव और समय पर दवा का सेवन ही इस बीमारी से बचने का प्रमुख उपाय है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष में एक बार लगातार तीन वर्षों तक सामूहिक रूप से दवा सेवन कराने से फाइलेरिया का उन्मूलन संभव है। भारत सरकार ने फाइलेरिया उन्मूलन के लिए वर्ष 2027 को लक्ष्य वर्ष घोषित किया है। घोरावल तहसील के कुछ गांवों में दवा सेवन को लेकर लोगों में झिझक और विरोध की स्थिति पर अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की।
इस समस्या को दूर करने के लिए विशेष जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि कुलेक्स प्रजाति के मच्छर फाइलेरिया के वाहक होते हैं, जो संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में यह बीमारी फैलाते हैं। इसलिए इस अभियान की सफलता के लिए सामुदायिक सहभागिता और जनसहयोग को अत्यंत आवश्यक बताया गया।
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