रामपुर में मुस्लिम समाज पर अत्याचार के विरोध में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया

रामपुर: उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के आह्वान पर प्रदेश में मुस्लिम समाज पर हो रहे जुल्म और अत्याचारों के विरोध में सोमवार को रामपुर जिला अध्यक्ष फ़रीदुज़ ज़फ़र रहमानी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया कि “2014 से केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद से देश में धार्मिक उन्माद और आपसी वैमनस्य का माहौल पैदा किया गया है।” इसमें उल्लेख किया गया कि 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश में मुसलमानों पर विभिन्न बहानों से अत्याचार किए जा रहे हैं — कभी गौहत्या के नाम पर, कभी दाढ़ी-टोपी या धार्मिक स्थलों के नाम पर, तो कभी लव जिहाद के आरोप में।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि तथाकथित गौरक्षक, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, हिंदू सेना और आरएसएस जैसे संगठन समय-समय पर धार्मिक नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। “कहीं मोब लिंचिंग हो रही है, तो कहीं निर्दोषों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पुलिस द्वारा फर्जी मुकदमे दर्ज कर प्रताड़ित किया जा रहा है,” ज्ञापन में कहा गया।

प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुई घटना का जिक्र करते हुए बताया कि शासन के निर्देश पर प्रशासन ने हिंसा रोकने के नाम पर इस्लाम मानने वालों पर लाठियां बरसाईं, जिसमें कई मासूम और बुजुर्ग घायल हुए। “जबरन घरों से लोगों को खींचा गया और बुलडोजर चलाए गए,” ज्ञापन में कहा गया।

वहीं दूसरी ओर, फतेहपुर और आगरा में बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और करणी सेना जैसे संगठनों द्वारा खुलेआम तलवारें लहराने और नफरती भाषण देने की घटनाओं पर कोई कार्रवाई न होने का आरोप लगाया गया। ज्ञापन में कहा गया कि यह स्पष्ट करता है कि शासन प्रशासन ऐसे तत्वों को संरक्षण दे रहा है।

ज्ञापन में महामहिम राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार को संविधान सम्मत कल्याणकारी सरकार चलाने के निर्देश दिए जाएं। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने सुधार नहीं किया, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की जाएगी।

इस अवसर पर यूथ जिलाध्यक्ष शाह सलमान, मुख्य महासचिव अंसार अली, जिला महासचिव रईस अहमद, रफीक अहमद, विधानसभा अध्यक्ष ताहिर अली एडवोकेट, राष्ट्रीय महासचिव विकलांग सेवा संगठन सिफात अली, जिला महासचिव शादाब अली सैफी, सूनो, अयान और फ़िरोज़ सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

 

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