फूलन देवी की पुण्यतिथि पर गोविंदपुरी में सभा का आयोजन, समाजवादी नेताओं ने किया श्रद्धांजलि अर्पित
देवव्रत धामा व दिग्विजय सिंह ने फूलन देवी के साहसिक संघर्ष को बताया प्रेरणास्रोत
मोदीनगर, 25 जुलाई। पूर्व सांसद वीरांगना श्रीमती फूलन देवी की पुण्यतिथि पर आज शाम समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव के निर्देशानुसार कमल इंटर कॉलेज, गोविंदपुरी में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस सभा का नेतृत्व समाजवादी नेता देवव्रत धामा ने किया।
सभा में महर्षि कश्यप समाज मोदीनगर के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह देशवाल भी उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने फूलन देवी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें दलित-पिछड़े समाज की आवाज और साहस की प्रतिमूर्ति बताया।
फूलन देवी: साहस की साक्षात प्रतिमूर्ति
अपने संबोधन में देवव्रत धामा और दिग्विजय सिंह ने कहा कि फूलन देवी उस समय सामाजिक अन्याय और जातिगत उत्पीड़न के खिलाफ खड़ी हुईं जब महिलाएं शिक्षा से वंचित थीं और दलित-पिछड़ों को समाज में बराबरी का हक नहीं था। उन्होंने कहा कि फूलन देवी ने अपने जीवन में जो संघर्ष किया, वह दुर्गा के स्वरूप को दर्शाता है।
उनका कहना था कि जब बलात्कारियों और अत्याचारियों के खिलाफ कानून चुप था, तब फूलन देवी ने न्याय की तलवार खुद उठाई।
भाजपा पर जमकर निशाना
सभा में भाजपा पर भी जमकर निशाना साधा गया। वक्ताओं ने कहा कि आज भी दलितों और पिछड़ों के मंदिरों में प्रवेश को लेकर घटनाएं सामने आती हैं। महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों में भी भाजपा नेताओं का नाम आना दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
सभा में यह भी कहा गया कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसी योजनाएं सिर्फ चुनावी जुमले बनकर रह गई हैं, जबकि हकीकत में महिलाएं आज भी असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
सभा में मौजूद रहे कई गणमान्य
इस अवसर पर कई प्रमुख नेता और समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं:
विधानसभा उपाध्यक्ष राजेश जाटव
विधानसभा सचिव मुनीश ठेकेदार
युवजन सभा अध्यक्ष पुनीत वर्मा
नगर अध्यक्ष दीनू खान
विधानसभा सचिव बादल ठेकेदार
फारुख मलिक (नगर अध्यक्ष पतला)
आमीर खान सारा
पूर्व जिला अध्यक्ष महिला सभा कमलेश चौधरी
नजमु मलिक, बिन्दर कश्यप, प्रमोद कश्यप, दीपक कश्यप सहित
कश्यप समाज के सैकड़ों लोगों ने इस सभा में भाग लेकर फूलन देवी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि फूलन देवी की लड़ाई आज भी अधूरी है और उनके विचारों को आगे बढ़ाना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक था, बल्कि सामाजिक न्याय की आवाज बुलंद करने का संकल्प भी।
