कूड़ेदान में मिली नन्ही परी को मिला नया परिवार,लखीसराय से ओडिशा तक उम्मीद की कहानी

विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान,में एक भावनात्मक और मानवता से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षण मिला देखने को

लखीसराय(सरफराज आलम) लखीसराय के विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान,में एक भावनात्मक और मानवता से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षण देखने को मिला, जब संस्थान में आवासित बालिका परी कुमारी को दत्तक ग्रहण पूर्व पालन-पोषण एवं देखरेख (Pre-Adoption Foster Care) के लिए ओडिशा राज्य के एक दंपति को सौंपा गया। यह पूरी प्रक्रिया केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी एवं विधिसम्मत तरीके से संपन्न की गई।उल्लेखनीय है कि बालिका परी कुमारी को 31 जुलाई 2025 को लखीसराय के नया बाजार क्षेत्र स्थित गोपाल भंडार गली में झाड़ियों के पास एक कूड़ेदान में झोले के भीतर परित्यक्त अवस्था में पाया गया था। स्थानीय नागरिक की सतर्कता से तत्काल उसे SNCU, सदर अस्पताल, लखीसराय में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों द्वारा उसका समुचित इलाज किया गया। स्वास्थ्य स्थिति में सुधार के बाद 11 अगस्त 2025 को बालिका को विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान, लखीसराय में स्थानांतरित किया गया।संस्थान में रहने के दौरान बालिका की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण, देखभाल और विकासात्मक निगरानी की गई। तीन माह से अधिक अवधि तक संरक्षण में रहने के बाद CARA पोर्टल पर पूर्व से पंजीकृत दत्तक अभिभावकों (PAP) के आवेदन के आधार पर दत्तक प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। चयनित दंपति ओडिशा के कालाहांडी जिला के निवासी हैं और वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक, नवी मुंबई में वरीय अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। दोनों का पंजीकरण लगभग तीन वर्ष पूर्व किया गया था।सभी औपचारिकताओं, दस्तावेजी प्रक्रिया एवं समिति की स्वीकृति के बाद बालिका को दत्तक ग्रहण पूर्व पालन-पोषण के लिए दंपति को सौंपा गया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने बालिका के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और विश्वास जताया कि प्रेम, सुरक्षा और पारिवारिक माहौल में उसका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा।डीएम मिथिलेश मिश्र ने इसे बाल संरक्षण व्यवस्था की एक सकारात्मक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया दर्शाती है कि प्रशासन, समाज और संस्थागत व्यवस्था के सामूहिक प्रयास से परित्यक्त बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्नेहपूर्ण जीवन दिया जा सकता है। उन्होंने संबंधित विभागों और संस्थान की भूमिका की सराहना की।
कार्यक्रम में सहायक निदेशक सह अध्यक्ष दत्तक ग्रहण समिति, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) वंदना पाण्डेय, बाल संरक्षण पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई के प्रतिनिधि, संस्थान के समन्वयक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आया कर्मी उपस्थित रहे।
यह घटना न केवल एक बच्ची के नए जीवन की शुरुआत है, बल्कि समाज के लिए यह संदेश भी है कि संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और सही व्यवस्था से हर परित्यक्त बच्चे को एक बेहतर भविष्य दिया जा सकता है।

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