केवल आर्टिकल या वीडियो बनाने पर पत्रकार के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज नहीं हो सकता – सुप्रीम कोर्ट
- रिपोर्ट: सुकेश पांडेय
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि मात्र आर्टिकल लिखने या समाचार वीडियो बनाने को आधार बनाकर किसी पत्रकार के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी शीर्ष अदालत ने उस याचिका की सुनवाई के दौरान की, जिसमें ‘द वायर’ के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और ‘फाउंडेशन ऑफ इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म’ के सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई थी।
मामला असम पुलिस द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फाइटर प्लेन के कथित नुकसान पर रिपोर्टिंग से जुड़ा है। पुलिस ने इस रिपोर्टिंग को आधार बनाकर वरदराजन और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकारों को गिरफ्तारी से राहत देते हुए असम पुलिस से सवाल किया—“क्या केवल लेख लिखने या समाचार वीडियो तैयार करने के लिए पत्रकारों को इस तरह के मामलों में फंसाया जाना चाहिए? क्या इसके लिए गिरफ्तारी उचित है?”
अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का अहम स्तंभ है और पत्रकारिता के मूल कार्य को देशद्रोह की श्रेणी में रखना संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है।
