Guest Teacher Regularization: हरियाणा में 12 हजार अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की मांग, कुमारी सैलजा बोलीं- सरकार बनाए स्पष्ट नीति

21 वर्षों से सेवाएं दे रहे 12 हजार अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की मांग पर गंभीरता से विचार करे सरकार

Haryana Guest Teacher Regularization: हरियाणा में अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण और भविष्य को लेकर कांग्रेस सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने राज्य सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि करीब 12 हजार अतिथि अध्यापक पिछले 21 वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी नियमितीकरण की मांग अब तक पूरी नहीं हुई है। सरकार को उनके लंबे अनुभव और शिक्षा व्यवस्था में योगदान को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि अतिथि अध्यापकों ने विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी के बावजूद सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखने में भूमिका निभाई है। इतने लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद उनके भविष्य को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने सरकार से शिक्षकों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालने का आग्रह किया।

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Guest Teacher Regularization: सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों पर भर्ती तेज करने की मांग

सैलजा ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, राज्य में लगभग 29,866 शिक्षकों के पद खाली बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई स्कूल सीमित स्टाफ के सहारे संचालित हो रहे हैं। सरकार को रिक्त पदों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए और भर्ती प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए।

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उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा भी उठाया। सैलजा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से अतिथि अध्यापकों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर उनकी मांगों पर व्यावहारिक समाधान निकालने का आग्रह किया।

Guest Teacher Regularization: गैरसैंण में जनभागीदारी पर टिप्पणी, दिल्ली रैली को लेकर भी किया दावा

कुमारी सैलजा ने उत्तराखंड के गैरसैंण में विधानसभा घेराव के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भागीदारी को जनअसंतोष का संकेत बताया। उन्होंने यह भी दावा किया कि 1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित रैली में हरियाणा, उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों लोग शामिल होंगे।

उनके अनुसार, रैली के माध्यम से केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा।

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