Diwali Flight Ticket Price: दिवाली-छठ पर घर जाना हुआ महंगा, कम सीटों और महंगे ईंधन ने बढ़ाया हवाई किराया
Diwali Flight Ticket Price: दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों पर अपने घर और परिवार के पास पहुंचने की चाह रखने वाले यात्रियों को इस बार हवाई टिकट के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। अक्टूबर 2026 में त्योहारों से पहले घरेलू हवाई किराये में तेजी देखने को मिल रही है। इसकी प्रमुख वजहों में यात्रियों की बढ़ती मांग, कुछ एयरलाइंस की सीट क्षमता में कटौती और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतें शामिल हैं।
आमतौर पर त्योहारों के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ने पर एयरलाइंस अतिरिक्त उड़ानें शुरू करती हैं या सीटों की उपलब्धता बढ़ाती हैं। लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग दिखाई दे रही है। कई एयरलाइंस ने पिछले साल की तुलना में अपनी क्षमता घटाई है। ऐसे में जिन यात्रियों को त्योहार के निश्चित दिनों में यात्रा करनी है, उनके सामने सीमित विकल्प और महंगे टिकट की चुनौती है।
Diwali Flight Ticket Price: IndiGo और Air India की सीट क्षमता में कमी
भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo और दूसरी बड़ी एयरलाइन Air India की अक्टूबर 2026 की सीट क्षमता में पिछले साल की तुलना में कमी दर्ज की गई है। एविएशन एनालिटिक्स कंपनी OAG के आंकड़ों के अनुसार, IndiGo ने अक्टूबर में लगभग 1.31 करोड़ सीटें निर्धारित कीं, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 0.2 प्रतिशत कम हैं। इसका अर्थ है कि लगभग 28,600 सीटें कम उपलब्ध हैं।
वहीं, Air India की अक्टूबर में निर्धारित सीट क्षमता लगभग 33.2 लाख रही, जो पिछले साल की तुलना में 12.6 प्रतिशत कम है। इस गिरावट का मतलब लगभग 4.78 लाख कम सीटों से है। कंपनी अपनी परिचालन व्यवस्था में बदलाव और वित्तीय चुनौतियों के बीच काम कर रही है।
SpiceJet की क्षमता में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एयरलाइन की सीट क्षमता में सालाना आधार पर 38.8 प्रतिशत की कमी आई। इसके उलट Akasa Air ने अपनी क्षमता में लगभग 35.6 प्रतिशत की वृद्धि की।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सभी एयरलाइंस की रणनीति एक जैसी नहीं है। कुछ कंपनियां अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं, जबकि अन्य लागत और परिचालन संबंधी चुनौतियों के बीच उड़ानों तथा सीटों की संख्या को समायोजित कर रही हैं।
Diwali Flight Ticket Price: त्योहारों में बढ़ती मांग से क्यों बढ़ते हैं टिकट के दाम?
दिवाली और छठ के समय बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार या पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में रहने के बावजूद अपने घर लौटना चाहते हैं। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से पटना, वाराणसी, कोलकाता तथा दूसरे शहरों के लिए यात्रियों की मांग बढ़ जाती है।
जब किसी उड़ान में सस्ती श्रेणी की सीटें बुक हो जाती हैं, तो यात्रियों को अगले महंगे किराया विकल्प चुनने पड़ सकते हैं। एयरलाइंस आम तौर पर मांग और उपलब्ध सीटों के अनुसार किराया तय करती हैं। इसलिए त्योहार के आसपास यात्रा की मांग बढ़ने और सीटों की उपलब्धता सीमित होने पर टिकट के दाम तेजी से ऊपर जा सकते हैं।
5 अक्टूबर की रिपोर्ट में उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर से 10 नवंबर के बीच यात्रा के लिए दिल्ली-हैदराबाद मार्ग पर औसत एकतरफा किराया पिछले साल की तुलना में 68 प्रतिशत अधिक बताया गया। मुंबई-कोलकाता मार्ग पर 51 प्रतिशत, दिल्ली-गोवा मार्ग पर 39 प्रतिशत और मुंबई-बेंगलुरु मार्ग पर 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि, किराये में बढ़ोतरी हर रूट पर एक जैसी नहीं है। किसी मार्ग पर उड़ानों और सीटों की संख्या बढ़ सकती है, जबकि दूसरे मार्ग पर विकल्प घटने के कारण यात्रियों को अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।
Diwali Flight Ticket Price: कम उड़ानें और बड़े विमान: क्या है पूरा मामला?
OAG के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही में घरेलू उड़ानों की निर्धारित संख्या पिछले साल की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत कम है। हालांकि, कुल सीट क्षमता में कमी लगभग 1.2 प्रतिशत है।
इसका मतलब है कि एयरलाइंस कुछ मार्गों पर कम उड़ानें संचालित करते हुए बड़े विमानों का इस्तेमाल कर रही हैं। बड़े विमान एक उड़ान में ज्यादा यात्रियों को ले जा सकते हैं, इसलिए उड़ानों की संख्या कम होने के बावजूद कुल सीटों में गिरावट अपेक्षाकृत कम रह सकती है।
लेकिन यात्रियों के लिए केवल कुल सीटों की संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं होती। उड़ान किस समय उपलब्ध है, कितने विकल्प हैं और यात्रा की तारीख कितनी व्यस्त है—ये सभी बातें भी मायने रखती हैं। यदि किसी यात्री को एक निश्चित दिन या समय पर पहुंचना है, तो सीमित उड़ानों के कारण उसके विकल्प कम हो सकते हैं।
क्षमता में बदलाव का असर अलग-अलग मार्गों पर अलग दिखाई दे रहा है। उदाहरण के तौर पर, मुंबई-जामनगर मार्ग पर सीट क्षमता पिछले साल की तुलना में तीन गुने से अधिक हो गई। इसके विपरीत, अहमदाबाद-कोलकाता मार्ग पर क्षमता 20.9 प्रतिशत और हैदराबाद-जयपुर मार्ग पर 33.1 प्रतिशत कम बताई गई।
Diwali Flight Ticket Price: महंगा एविएशन फ्यूल भी बढ़ा रहा है दबाव
हवाई टिकट महंगे होने के पीछे एक अन्य महत्वपूर्ण वजह विमान ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं। एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF एयरलाइंस के परिचालन खर्च का बड़ा हिस्सा होता है। जब ईंधन महंगा होता है, तो विमान संचालन की लागत बढ़ जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से घरेलू ATF की कीमत लगभग 121 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 137 रुपये प्रति लीटर हो गई। सितंबर में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
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विमान ईंधन के अलावा एयरलाइंस को विमान लीज पर लेने, रखरखाव, कर्मचारियों और अन्य परिचालन जरूरतों पर भी खर्च करना पड़ता है। इनमें से कुछ खर्च डॉलर से जुड़े होते हैं, इसलिए रुपये की कीमत में गिरावट भी कंपनियों की लागत को प्रभावित कर सकती है।
जब ईंधन और अन्य खर्च बढ़ते हैं, तो एयरलाइंस के लिए कम किराये पर टिकट उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है। खासकर तब, जब त्योहारों के कारण मांग पहले से अधिक हो और अतिरिक्त उड़ानें तुरंत शुरू करना संभव न हो।
Diwali Flight Ticket Price: किन रूटों पर यात्रियों को ज्यादा परेशानी हो सकती है?
त्योहारी सीजन में उन मार्गों पर ज्यादा दबाव देखने को मिल सकता है, जहां बड़ी संख्या में लोग कामकाज वाले शहरों से अपने गृह नगरों की ओर जाते हैं। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से उत्तर भारत तथा पूर्वी भारत के शहरों के लिए यात्रा की मांग इस दौरान बढ़ सकती है।
हालांकि, किसी विशेष मार्ग पर किराया कितना होगा, यह यात्रा की तारीख, बुकिंग के समय, उपलब्ध सीटों और एयरलाइन के अनुसार बदलता रहता है। इसलिए किसी एक मार्ग के आंकड़े को पूरे देश की स्थिति नहीं माना जा सकता।
यात्रियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि एक ही रूट पर अलग-अलग समय की उड़ानों के किराये में अंतर हो सकता है। सुबह, दोपहर या शाम की उड़ान चुनने से उपलब्ध विकल्प बदल सकते हैं। इसी तरह, त्योहार के मुख्य दिन की तुलना में उससे पहले या बाद में यात्रा करने पर भी किराये में अंतर संभव है।
Diwali Flight Ticket Price: हवाई किराये पर सरकारी नियमों की चर्चा
हवाई किराये में बढ़ोतरी के बीच विमानन क्षेत्र के नियमन को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।19 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नियमों को अंतिम रूप दिया जा चुका है और उन्हें दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित किए जाने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाशित नियमों को अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित बताई गई है। इससे पहले अदालत ने हवाई किराये को तर्कसंगत बनाने के विषय पर ध्यान दिया था।
हालांकि, नियमों की घोषणा या प्रक्रिया पूरी होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी मार्गों पर किराये तुरंत कम हो जाएंगे। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नियम किस रूप में लागू होते हैं और यात्रियों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किए जाते हैं।
Diwali Flight Ticket Price: यात्रियों के लिए क्या है जरूरी?
त्योहारों के दौरान यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपनी तारीख और समय के विकल्प पहले से तय रखें। एक ही तारीख पर अलग-अलग एयरलाइंस और उड़ानों के किराये की तुलना करना उपयोगी हो सकता है। यदि यात्रा में लचीलापन है, तो आसपास की तारीखों के विकल्प देखने से भी अंतर समझने में मदद मिल सकती है।
टिकट बुक करने से पहले सामान ले जाने के नियम, बदलाव या रद्द करने की शर्तें और अंतिम भुगतान राशि भी देखनी चाहिए। केवल शुरुआती किराया देखकर निर्णय लेने से अतिरिक्त शुल्क का पता बाद में चल सकता है।
कुल मिलाकर, दिवाली और छठ के दौरान हवाई यात्रा महंगी होने के पीछे केवल त्योहारी मांग नहीं, बल्कि एयरलाइंस की क्षमता, ईंधन की कीमत और परिचालन लागत जैसे कई कारण हैं। जब सीमित विकल्पों के बीच अधिक यात्री यात्रा करना चाहते हैं, तो किराये पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में यात्रियों को समय रहते विकल्पों की तुलना करनी चाहिए, जबकि विमानन क्षेत्र के लिए चुनौती बढ़ती मांग और परिचालन खर्च के बीच संतुलन बनाए रखने की है।
