Lawyers Protest: लालगंज में SDM के खिलाफ अधिवक्ताओं का आंदोलन सातवें दिन भी जारी, राजस्व मामलों की सुनवाई प्रभावित
Lalganj Lawyers Protest: मिर्जापुर के लालगंज तहसील में एसडीएम की कार्यशैली के विरोध में अधिवक्ताओं का कार्य बहिष्कार सातवें दिन भी जारी रहा। उपरौध अधिवक्ता समिति के बैनर तले अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन किया और न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। लगातार कार्य बहिष्कार के कारण राजस्व से जुड़े मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। इससे तहसील आने वाले वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Lawyers Protest: क्या है अधिवक्ताओं की नाराजगी का कारण?
उपरौध अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष एडवोकेट राजेंद्र प्रसाद मौर्य और सचिव एडवोकेट उमाशंकर सिंह पटेल के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत 9 जुलाई 2026 को आयोजित आपात बैठक के बाद हुई थी। बैठक में अधिवक्ताओं ने तहसील में राजस्व वादों के निस्तारण और ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर अपनी शिकायतें रखीं।

अधिवक्ताओं का आरोप है कि धारा 24, 76, 116 और 32/38 से संबंधित मामलों में रिपोर्ट आने के बाद भी कई-कई महीने तक राजस्व परिषद के पोर्टल पर ऑनलाइन फीडिंग नहीं की जाती। उनका यह भी आरोप है कि कुछ मामलों में पोर्टल पर दर्ज किए बिना आदेश पारित कर दिए जाते हैं और बाद में उन्हें पिछली तारीख में अपलोड किया जाता है।
Lawyers Protest: फाइलों के रखरखाव और वादों के निस्तारण पर सवाल
अधिवक्ताओं ने तहसील में फाइलों के रखरखाव की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फाइलें व्यवस्थित तरीके से नहीं रखी जातीं, जिससे मामलों के समय पर निस्तारण में देरी होती है।
समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि धारा 24 से जुड़े कुछ मामलों में जानबूझकर देरी की जाती है और बाद में साक्ष्य के अभाव का हवाला देकर वाद खारिज कर दिए जाते हैं। अधिवक्ताओं ने इन प्रक्रियागत समस्याओं के साथ अवैध वसूली और वादकारियों के शोषण के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन का पक्ष उपलब्ध नहीं है।
अधिवक्ताओं ने न्यायालय की गरिमा बनाए रखने और राजस्व मामलों की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित करने की मांग की है।
Lawyers Protest: अधिवक्ताओं की चार सूत्रीय मांगें
उपरौध अधिवक्ता समिति ने राजस्व मामलों की प्रक्रिया में सुधार के लिए चार सूत्रीय मांगें रखी हैं। उपलब्ध विवरण में पहली मांग के अनुसार, सभी लंबित वादों को संबंधित रिपोर्ट आने के 7 से 10 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से ऑनलाइन दर्ज किया जाना चाहिए।
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