UP Lekhpal Strike 2026: 17 अक्टूबर से प्रदेशभर में लेखपाल करेंगे काम बंद, 8 मांगों पर सरकार को अल्टीमेटम
UP Lekhpal Strike 2026: उत्तर प्रदेश में लेखपालों की लंबित मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन अब और तेज होता दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने आठ सूत्रीय मांगों के समाधान को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दिया है। संघ की ओर से 8 अक्टूबर से सरकारी व्हाट्सऐप ग्रुप छोड़ने और आय, जाति, निवास तथा वरासत से जुड़े ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार शुरू करने की बात कही गई है। इसके बाद भी यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता है तो 17 अक्टूबर 2026 से प्रदेशभर में संपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
लेखपाल संघ का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित हैं। इनमें वेतन विसंगति दूर करना, शुरुआती वेतनमान में बदलाव, अंतरमंडलीय स्थानांतरण, पदोन्नति, भत्तों में बढ़ोतरी और काम करने के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे शामिल हैं। संघ के आंदोलन से तहसील स्तर पर राजस्व से जुड़े काम प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
UP Lekhpal Strike 2026: वेतनमान और स्थानांतरण को लेकर सबसे बड़ा मुद्दा
लेखपालों की प्रमुख मांगों में प्रारंभिक वेतनमान को लेवल-5 और ग्रेड पे 2800 किए जाने की मांग शामिल है। संघ के मुताबिक यह मुद्दा वर्ष 2017 से लंबित है। लेखपालों का कहना है कि उनकी जिम्मेदारियां और काम लगातार बढ़े हैं, लेकिन वेतन से जुड़ी विसंगतियों का समाधान अभी तक नहीं हुआ है।
इसके अलावा अंतरमंडलीय स्थानांतरण भी लेखपालों के आंदोलन का एक बड़ा मुद्दा है। संघ के अनुसार मई 2025 में 2669 लेखपालों से अंतरमंडलीय स्थानांतरण के लिए आवेदन लिए गए थे। इसके बावजूद करीब 2700 लेखपाल अब भी अपने गृह क्षेत्र से काफी दूर तैनात हैं। संघ चाहता है कि इच्छुक लेखपालों के लिए स्थानांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए, ताकि लंबे समय से दूर तैनाती की समस्या का समाधान हो सके।
लेखपालों का कहना है कि कई कर्मचारी सैकड़ों किलोमीटर दूर तैनात हैं। ऐसी स्थिति में पारिवारिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के साथ नौकरी करना उनके लिए मुश्किल होता है। इसी वजह से अंतरमंडलीय स्थानांतरण की मांग को आंदोलन में प्रमुख स्थान दिया गया है।
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UP Lekhpal Strike 2026: पदोन्नति और प्रशिक्षण परीक्षा के परिणाम की मांग
लेखपाल संघ ने चयन वर्ष 2025-26 की पदोन्नति सूची जल्द जारी करने की भी मांग की है। संघ के अनुसार 29 अप्रैल 2026 को विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी पदोन्नति सूची जारी नहीं की गई है। लेखपालों का कहना है कि पदोन्नति से जुड़े मामलों में देरी के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
इसके साथ ही नवनियुक्त लेखपालों की प्रशिक्षण परीक्षा का परिणाम जारी करने और आगे की प्रक्रिया पूरी करने की मांग भी की गई है। संघ के अनुसार 13 सितंबर 2025 को हुई प्रशिक्षण परीक्षा का परिणाम अब तक लंबित है। लेखपालों का कहना है कि परिणाम और संबंधित प्रक्रिया में देरी से नए कर्मचारियों के स्थायीकरण समेत दूसरे प्रशासनिक मामलों पर भी असर पड़ता है।
लेखपाल संघ का कहना है कि सरकार को इन मामलों में जल्द फैसला लेना चाहिए, ताकि कर्मचारियों से जुड़े लंबित मामलों का निस्तारण हो सके।
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UP Lekhpal Strike 2026: भत्ते बढ़ाने और काम के लिए सुविधाएं देने की मांग
आंदोलन में लेखपालों ने विभिन्न भत्तों में बढ़ोतरी की मांग भी रखी है। संघ ने स्टेशनरी भत्ते को मौजूदा राशि से बढ़ाकर ₹500 करने की मांग की है। इसके अलावा नियत यात्रा भत्ते के स्थान पर ₹1500 प्रतिमाह मोटरसाइकिल भत्ता और विशेष भत्ते को ₹1000 प्रतिमाह करने की मांग की गई है।
लेखपालों का तर्क है कि उनके काम का बड़ा हिस्सा फील्ड से जुड़ा है। राजस्व संबंधी कार्यों के लिए गांवों और अलग-अलग क्षेत्रों में जाना पड़ता है। ऐसे में यात्रा और दूसरे जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त भत्ता मिलना जरूरी है।
संघ ने कार्यालयी पटलों पर सम्बद्ध लेखपालों को मूल कार्यों में वापस भेजने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा ग्राम सचिवालयों में काम करने के लिए पर्याप्त कक्ष, कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
लेखपाल संघ चाहता है कि लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित किया जाए और कर्मचारियों को काम के लिए लैपटॉप तथा मोबाइल जैसे तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। संघ का कहना है कि राजस्व विभाग में बड़ी संख्या में काम अब ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से होता है, इसलिए कर्मचारियों को उसी के अनुरूप संसाधन मिलना जरूरी है।
UP Lekhpal Strike 2026: ग्राम सचिवालय में काम करने की व्यवस्था पर भी सवाल
लेखपाल संघ ने ग्राम सचिवालयों में लेखपालों को बैठाकर काम कराने की व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि एक लेखपाल के पास कई गांवों का दायित्व हो सकता है। ऐसे में किसी एक स्थान पर बैठकर लगातार काम करना व्यावहारिक नहीं है।
संघ ने अयोध्या की सोहावल तहसील में 20 अगस्त 2026 को पंचायत भवन में काम कर रहे एक लेखपाल के खिलाफ हुई एंटी करप्शन ट्रैप की घटना का भी उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए स्पष्ट व्यवस्था, पर्याप्त सुविधाएं और सुरक्षा जरूरी है।
लेखपालों की भूमिका केवल कार्यालय में दस्तावेज तैयार करने तक सीमित नहीं रहती। राजस्व अभिलेखों से जुड़े काम, आय-जाति-निवास प्रमाणपत्रों की जांच, वरासत, नामांतरण, पैमाइश और कई अन्य प्रशासनिक कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए यदि प्रदेशभर में संपूर्ण कार्य बहिष्कार होता है तो तहसील स्तर पर आम लोगों से जुड़े कई काम प्रभावित हो सकते हैं।
UP Lekhpal Strike 2026: 17 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में काम बंद करने की चेतावनी
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने साफ किया है कि 8 अक्टूबर से ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार के बाद अगला बड़ा कदम 17 अक्टूबर से संपूर्ण कार्य बहिष्कार का होगा। संघ का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो प्रदेशभर के लेखपाल कामकाज पूरी तरह बंद कर आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।
इससे आय, जाति, निवास, वरासत, नामांतरण, पैमाइश और अन्य राजस्व संबंधी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। अलग-अलग जिलों से सामने आई रिपोर्टों में भी लेखपाल संघ की ओर से चरणबद्ध आंदोलन और 17 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।
लेखपाल संघ ने सरकार और राजस्व परिषद से मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की अपील की है। संघ का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन की वजह से प्रशासनिक कार्यों में आने वाली परेशानी की जिम्मेदारी शासन और राजस्व परिषद की होगी।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और राजस्व विभाग लेखपालों की आठ सूत्रीय मांगों पर क्या कदम उठाते हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत से समाधान निकलता है तो प्रस्तावित कार्य बहिष्कार टल सकता है, लेकिन मांगें लंबित रहने की स्थिति में 17 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी आंदोलन का असर तहसील और ग्रामीण स्तर की राजस्व सेवाओं पर दिखाई दे सकता है।
