Chainpur Police Assault Case: विकास बाबू एडवोकेट की दमदार पैरवी का असर, SHO राजेश बाबू के खिलाफ FIR दर्ज

पुरानी खबर में थाने में पिटाई के आरोप से लेकर कोर्ट के आदेश तक पहुंचा मामला, विकास बाबू ने अदालत में उठाए गंभीर सवाल

Bithari Chainpur Police Assault Case: बिथरी चैनपुर थाने में युवक अनिल के साथ कथित पुलिस मारपीट का मामला अब अदालत के आदेश के बाद नए मोड़ पर पहुंच गया है। मामले में विकास बाबू एडवोकेट की प्रभावी पैरवी के बाद विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट, बरेली की अदालत ने 07 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए थाना बिथरी चैनपुर पुलिस को उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधि के अनुसार विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस को सात दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत करनी होगी।

पहले खबर आई-थाने में पिटाई से बिगड़ी युवक की हालत

इस पूरे मामले की शुरुआत उस खबर से हुई थी जिसमें सामने आया था कि छेड़छाड़ की सूचना पर डायल-112 पुलिस अनिल को बिथरी थाने लेकर पहुंची थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि थाने में अनिल के साथ बुरी तरह मारपीट की गई।

खबर के अनुसार अस्पताल पहुंचने पर अनिल की हालत बेहद गंभीर थी। चिकित्सकों ने उसे CPR दिया, जिसके बाद उसकी धड़कन वापस आई। उसके हाथ की गंभीर चोट का ऑपरेशन किया गया और पहली सर्जरी में करीब 40 टांके लगाए जाने की बात सामने आई थी। दूसरी सर्जरी भी प्रस्तावित बताई गई थी।

bareilly-bithari-chainpur-police-marpeet-anil-court-order
विकास बाबू एडवोकेट

अनिल ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों ने उसके हाथ की अंगुलियों को जूते से कुचला और धारदार हथियार से हमला किया। वहीं पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि अनिल नशे में था और उसने खुद CCТNS कक्ष के शीशे के दरवाजे पर मुक्का मारा, जिससे हाथ में चोट आई।

सबसे बड़ा सवाल-अगर नशे में था तो मेडिकल कहां है?

मामले में पुलिस की ओर से अनिल के नशे में होने की बात कही गई थी, लेकिन अदालत के समक्ष उपलब्ध रिकॉर्ड पर ऐसा कोई मेडिकल पेपर नहीं था जो घटना के समय उसके intoxicated होने को प्रमाणित करता हो। यही बिंदु मामले की कानूनी पैरवी में महत्वपूर्ण बना। विकास बाबू एडवोकेट ने अदालत के समक्ष उपलब्ध चिकित्सकीय दस्तावेजों, शिकायतों और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस के घटनाक्रम पर उठने वाले सवालों को मजबूती से रखा।

यह भी पढ़ें-  Aviation Career Guidance Program in Amritsar: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा एविएशन करियर गाइडेंस कार्यक्रम का आयोजन

विकास बाबू एडवोकेट की पैरवी के बाद कोर्ट का बड़ा आदेश

अनिल की ओर से BNSS की धारा 173(4) के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद माना कि प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है। इसके बाद अदालत ने थाना बिथरी चैनपुर के SHO को उचित धाराओं में FIR दर्ज कर विवेचना करने का निर्देश दिया और सात दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

मामले में तत्कालीन SHO राजेश बाबू मिश्रा का नाम भी अनिल की शिकायत में सामने आया था। हालांकि अदालत का आदेश फिलहाल FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश है और इससे किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं हुई है। आरोपों की सत्यता विवेचना और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में तय होगी।

जमीन पर समाज की आवाज, अदालत में कानून की लड़ाई

विकास बाबू एडवोकेट, जो भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव भी हैं, सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका के लिए जाने जाते हैं। जमीन पर लोगों की समस्याओं और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाने के साथ अब अदालत में भी उनकी कानूनी पैरवी चर्चा में है। इस मामले में पुरानी खबर में सामने आए थाने में कथित मारपीट, गंभीर चोट, अस्पताल में CPR, सर्जरी और पुलिस के ‘नशे में होने’ के दावे से लेकर अब अदालत द्वारा FIR दर्ज कर विवेचना के आदेश तक घटनाक्रम पहुंच गया है।

अब जांच में CCTV फुटेज, डायल-112 की रिकॉर्डिंग/लॉग, थाना GD, मेडिकल रिकॉर्ड, पुलिसकर्मियों की भूमिका और घटना के समय मौजूद अन्य साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ सामाजिक मंच पर संघर्ष और दूसरी तरफ अदालत में कानून की पैरवी-अनिल प्रकरण में विकास बाबू एडवोकेट की भूमिका अब खास तौर पर चर्चा में है।

About The Author

Leave A Reply

Your email address will not be published.