Kanpur Businessman Murder: पत्नी, बेटे और बेटी के नाम थी वसीयत, अब प्रॉपर्टी एंगल से भी जांच तेज

Kanpur Businessman Murder: कानपुर के फार्मास्युटिकल कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड की जांच में पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं। अब इस मामले में संपत्ति और वसीयत के एंगल की भी जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2022 में पंजीकृत वसीयत में विनीत मनोचा ने अपनी संपत्तियों को पत्नी पुनीता, बेटे सुब्रत और बेटी शुभानी के नाम किया था। जांच में कानपुर और गाजियाबाद में उनकी संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संपत्ति के बंटवारे का हत्या से कोई संबंध था या नहीं।

विनीत मनोचा की 5 सितंबर की तड़के हत्या कर दी गई थी। वह कानपुर के बिरहाना रोड पर अपने बेटे के साथ फार्मास्युटिकल फर्म चलाते थे। इस मामले में उनकी बहू शालू, कथित शूटर विशाल गौतम और राज किशोर जेल में हैं। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे कई सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर हत्या से पहले और बाद के संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।

नए सिम से बेटे को की गई छह कॉल

जांच में सबसे अहम कड़ी एक नए मोबाइल सिम से जुड़ी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, कथित शूटर विशाल गौतम ने 3 सितंबर को नया सिम खरीदा था। इसके दो दिन बाद 5 सितंबर को विनीत मनोचा की हत्या हुई। पुलिस का कहना है कि इसी नए नंबर से शालू के अलावा विनीत के बेटे सुब्रत को भी छह बार फोन किया गया था।

अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हत्या से ठीक पहले खरीदे गए इस नए नंबर से सुब्रत को फोन क्यों किया गया। पुलिस के मुताबिक, यही सवाल जांच में सुब्रत की संभावित भूमिका को लेकर भी पड़ताल का कारण बना है। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

सात मोबाइल नंबरों के करीब 1000 पन्नों के रिकॉर्ड

पुलिस ने मामले की जांच के लिए सुब्रत, शालू और विशाल से जुड़े सात मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड हासिल किए हैं। ये रिकॉर्ड 1 मई से 6 सितंबर तक के बताए जा रहे हैं और करीब 1,000 पन्नों में हैं।

पुलिस इन रिकॉर्ड के जरिए यह समझने की कोशिश कर रही है कि हत्या से पहले और उसके बाद आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों के बीच कब और कितनी बातचीत हुई। पुलिस उपायुक्त पश्चिम एसएम कासिम अबिदी के मुताबिक, कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का उद्देश्य बातचीत के पैटर्न और घटनाक्रम के बीच संबंध को समझना है।

सुब्रत और विशाल के बीच 309 बार बातचीत

जांच में पुलिस को यह भी पता चला है कि 1 मई से 5 सितंबर के बीच सुब्रत और विशाल गौतम के बीच करीब 309 बार बातचीत हुई थी। पुलिस के मुताबिक, विशाल पहले विनीत मनोचा की कंपनी में काम करता था। बाद में कथित चोरी के आरोप में उसे नौकरी से हटा दिया गया था।

नौकरी से हटाए जाने के बावजूद विशाल और सुब्रत के बीच संपर्क बना रहा। अब पुलिस इसी संपर्क की प्रकृति और हत्या से पहले दोनों के बीच हुई बातचीत के संदर्भ की जांच कर रही है। कॉल रिकॉर्ड को इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है।

शालू और विशाल से पूछताछ

पुलिस ने अदालत की अनुमति के बाद जेल में शालू और विशाल से पूछताछ की। दोनों से कथित साजिश, आपसी बातचीत और हत्या से पहले तथा बाद की गतिविधियों से जुड़े सवाल किए गए।

पुलिस के मुताबिक, शालू ने हत्या की योजना में शामिल होने से इनकार किया है। वहीं पुलिस का दावा है कि विशाल ने पूछताछ में कहा कि उसने शालू के कहने पर हत्या की। पुलिस के अनुसार, विशाल ने यह भी दावा किया कि उसे छह लाख रुपये और नौकरी देने का वादा किया गया था।

हालांकि, पूछताछ में सामने आए बयानों की पुष्टि अन्य साक्ष्यों से की जा रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों के साथ इन बयानों का मिलान कर रही है।

संपत्ति और कर्ज का एंगल भी जांच में

विनीत मनोचा की संपत्तियों को लेकर भी पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है। पुलिस के मुताबिक, 2022 की वसीयत में उनकी संपत्तियां पत्नी पुनीता, बेटे सुब्रत और बेटी शुभानी के नाम थीं। जांच के दौरान कानपुर और गाजियाबाद में उनकी संपत्तियों के बारे में जानकारी मिली है।

इनमें बिरहाना रोड का फ्लैट और कैनाल रोड की संपत्ति समेत अन्य संपत्तियां शामिल हैं। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संपत्ति के बंटवारे और हत्या के बीच कोई संबंध था या नहीं। इसके अलावा सुब्रत पर कर्ज होने के संकेत भी जांच में मिले हैं, जिनमें ऑनलाइन क्रेडिट और अन्य देनदारियां शामिल होने की बात कही गई है।

हत्या के बाद की गतिविधियों की भी पड़ताल

पुलिस हत्या के बाद विशाल गौतम की गतिविधियों को भी ट्रैक कर रही है। जांच के मुताबिक, वारदात के बाद विशाल ने अपने सहयोगी राज किशोर को पांच बार फोन किया। इसके बाद वह उबर कैब से अपने ठिकाने तक गया।

पुलिस अब कैब के रूट, ड्राइवर के बयान और डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। इन जानकारियों के जरिए जांचकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि हत्या के बाद विशाल कहां गया और किन लोगों के संपर्क में रहा।

सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों से जोड़ी जा रही कड़ियां

मामले की जांच में पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल पेमेंट, कैब से जुड़ी जानकारी और आरोपियों के बयानों को भी एक साथ देख रही है। पुलिस के मुताबिक, इन सभी साक्ष्यों का मिलान करके घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

फिलहाल जांच का दायरा सिर्फ कथित शूटर और बहू तक सीमित नहीं है। नए मोबाइल नंबर से सुब्रत को की गई छह कॉल और दोनों के बीच हुई 309 बातचीत के सामने आने के बाद पुलिस उसके संपर्कों और संभावित भूमिका से जुड़े सवालों की भी जांच कर रही है। वहीं, वसीयत और संपत्ति से जुड़े पहलुओं की जांच यह स्पष्ट करने के लिए की जा रही है कि क्या आर्थिक या पारिवारिक विवाद का इस हत्याकांड से कोई संबंध था।

मामले में अभी जांच जारी है और पुलिस द्वारा जुटाए जा रहे डिजिटल, आर्थिक और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल किसी भी संदिग्ध की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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