सिंचाई विभाग की अनदेखी से ग्राम ढाणी शैरा , भाखडा डिस्ट्रीब्यूटर की टेल के अंतिम गांवों में पेयजल संकट गहराया, ग्रामीणों एवं किसानों में भारी आक्रोश
Ellenabad, September 14 (एम पी भार्गव ): ढाणी शैरा भाखड़ा डिस्ट्रीब्यूटर की टेल पर बसे करीब आधा दर्जन गांवों में पेयजल संकट अब गंभीर रूप ले चुका है। टेल के अंतिम गांव कर्मशाना,ढाणी शैरा, मिठनपुरा,किशनपुरा,खारी सुरेरा शाहिद सैकड़ो ढाणियो व कसबो में लगभग 20 हजार की आबादी के साथ हजारों पशुधन के सामने भी स्वच्छ पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण समाजसेवी व पर्यावरण प्रेमी युवा किसान कुलदीप मुंदलिया,सोसाइटी डायरेक्टर नौरंग लाल भांभू,राजेंद्र मुंदलिया,चेतराम झौरड,अनिल जाखड़,संदीप सिंहमार, मदनलाल ढाणी शैरा, राजेंद्र ढाणी शैरा का आरोप है कि बार-बार समस्या से अवगत करवाने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में फसल सीजन चलने के कारण पानी की मांग पहले से अधिक है। टेल के अंतिम गांवों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीणों को बाहर से पानी मंगवाना पड़ रहा है,वही पेयजल की लागत लगभग दोगुनी हो गई है।वहीं गांवों के जलघरों में बने बोरवेल का पानी खारा होने के कारण वह पीने योग्य नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि दूषित एवं खारे पानी के कारण दस्त, बुखार और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं। स्थिति यह है कि पशुधन भी खारा पानी पीने से बचता नजर आ रहा है। ऐसे में ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है कि यदि समय रहते साफ पेयजल उपलब्ध नहीं करवाया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन एवं संबंधित नहरी विभाग से मांग की है कि टेल के अंतिम गांवों तक पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल की तत्काल व्यवस्था की जाए,वही ढाणी शेरा भाखड़ा डिस्ट्रीब्यूटर की 1 सितंबर से 15 सितंबर तक बनती है जबकि आज 14 सितंबर होने के बावजूद एक बूंद पानी टेल के गांव की जलघर को जाने वाली बूस्टिंग स्टेशन पाइपलाइन तक नहीं पहुंचा, नहरी बारी को 17 सितंबर की बजाय 25 सितंबर तक बढ़ाया जाए ताकि टेल के अंतिम गांव के जलघर को स्वच्छ पेयजल से भरा जा सके। वही जलघरों की स्थिति की जांच करवाई जाए तथा खारे पानी की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए लोगों को सड़क पर उतरना पड़ा तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवं प्रशासन की होगी।
