ईरान को ट्रंप की 4 शर्तें: परमाणु कार्यक्रम रोकने के बदले प्रतिबंध हटाने और सामान्य रिश्तों का प्रस्ताव
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता को परमाणु समझौते को लेकर एक सीधा पत्र भेजा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह पत्र Oman की मध्यस्थता के जरिए ईरान तक पहुंचाया गया। इसमें अमेरिका ने ईरान के सामने चार प्रमुख शर्तें रखी हैं और इनके बदले आर्थिक प्रतिबंध हटाने, सामान्य राजनयिक एवं कारोबारी संबंध बहाल करने तथा सुरक्षा गारंटी देने का प्रस्ताव रखा है।
ट्रंप के प्रस्ताव में क्या हैं चार प्रमुख शर्तें?
अमेरिकी प्रस्ताव का पहला और सबसे अहम बिंदु यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोकना और ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को खत्म करना है। इसके साथ अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण और सत्यापन के लिए पूरी पारदर्शिता की मांग की गई है।
दूसरी शर्त के तहत अमेरिका चाहता है कि ईरान मध्य-पूर्व में proxy groups और आतंकवादी संगठनों को समर्थन देना बंद करे। रिपोर्ट में खास तौर पर Lebanon के Hezbollah और Yemen के Houthis का उल्लेख किया गया है।
तीसरे बिंदु में ईरान से परमाणु हथियार विकसित करने से स्थायी रूप से पीछे हटने की मांग की गई है। यानी यह केवल कुछ समय के लिए रोक नहीं, बल्कि सत्यापन योग्य और अपरिवर्तनीय प्रतिबद्धता होनी चाहिए।
चौथी शर्त के तहत ईरान से ballistic missiles और उनसे जुड़ी तकनीक को दूसरे पक्षों तक पहुंचाने पर रोक लगाने की मांग की गई है।
बदले में ईरान को क्या मिलेगा?
इन शर्तों को स्वीकार करने की स्थिति में ट्रंप के पत्र में ईरान के लिए कई बड़े फायदे प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना, अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ पूर्ण राजनयिक एवं कारोबारी संबंध बहाल करना और स्पष्ट सुरक्षा गारंटी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव में यह भी संकेत दिया गया है कि अमेरिका ईरान में शासन परिवर्तन या अस्थिरता पैदा करने के प्रयासों का समर्थन नहीं करेगा। साथ ही, संवर्धन गतिविधियों को स्थायी रूप से रोकने की स्थिति में शांतिपूर्ण ऊर्जा जरूरतों के लिए नागरिक परमाणु तकनीक तक ईरान की पहुंच का समर्थन करने की बात कही गई है।
सैन्य तनाव के बीच आया ट्रंप का पत्र
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के सैन्य ढांचे, नौसैनिक संपत्तियों और मिसाइल उत्पादन से जुड़े ठिकानों पर महीनों से हमलों की स्थिति बनी हुई है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा है, जबकि तेहरान ने इस आकलन को खारिज किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के पत्र का संदेश काफी स्पष्ट है—ईरान समझौता स्वीकार करता है तो आर्थिक और कूटनीतिक रूप से आगे बढ़ सकता है, जबकि इनकार की स्थिति में उस पर आर्थिक और सैन्य दबाव जारी रहने की चेतावनी है। हालांकि, पत्र में कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है।
ईरान ने अभी नहीं दिया आधिकारिक जवाब
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से इस पत्र का सार्वजनिक जवाब अभी सामने नहीं आया है। इससे पहले ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि किसी भी बातचीत से पहले अमेरिका को सैन्य अभियान रोकना होगा और ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी हटानी होगी। अमेरिका ने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया है।
Oman इस पूरे मामले में अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल संपर्क का प्रमुख माध्यम रहा है और उसने पत्र पहुंचाने में अपनी भूमिका की पुष्टि की है।
क्यों अहम है यह प्रस्ताव?
इस प्रस्ताव की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि इसमें पहली बार अमेरिका की ओर से ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते के बदले क्या चाहिए और बदले में क्या दिया जा सकता है, इसका विस्तृत खाका सामने आया है।
अगर दोनों पक्ष इन शर्तों पर सहमत होते हैं, तो इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंधों और दोनों देशों के राजनयिक संबंधों को लेकर बड़ा बदलाव आ सकता है। वहीं, मौजूदा सैन्य और राजनीतिक तनाव को देखते हुए इस प्रस्ताव पर तेहरान की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
