रक्षाबंधन से पहले चीनी के दाम में उछाल, 65 रुपये किलो तक पहुंची कीमत; मिठाइयां भी होंगी महंगी
रक्षाबंधन से पहले चीनी की कीमतों में तेज उछाल आया है। कई जगह फुटकर में चीनी 65 रुपये किलो तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों से मिठाई और पेठे के दाम भी बढ़ने की आशंका है।
सावन के साथ ही देश में त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है। रक्षाबंधन, गणपति, जन्माष्टमी, करवाचौथ और दिवाली जैसे त्योहारों पर घरों में मिठाइयों और मीठे पकवानों की मांग बढ़ जाती है। लेकिन इस बार त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
बीते करीब एक महीने में चीनी के दाम में करीब 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है। फुटकर बाजार में कई जगह चीनी करीब 65 रुपये किलो तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई के साथ-साथ मिठाई कारोबार पर भी पड़ रहा है।
थोक बाजार में भी तेजी
चीनी की कीमतों में तेजी का असर थोक बाजार में भी दिखाई दे रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब एक महीने में चीनी के थोक भाव में लगभग 2,000 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है।
बृहस्पतिवार को थोक बाजार में चीनी करीब 6,200 रुपये प्रति क्विंटल, खांडसारी 6,000 रुपये, बूरा 6,600 रुपये और तगार 6,700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिकने की जानकारी सामने आई।
जमाखोरी पर सरकार सख्त
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच जमाखोरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक, जांच में यह बात सामने आई कि कुछ मिलों ने बड़े उपभोक्ताओं को चीनी बेचने के बावजूद उसकी डिलीवरी तत्काल नहीं की और स्टॉक को अपने गोदामों में रखा।
सरकार ने बाजार में कृत्रिम कमी रोकने के लिए बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा तय करने का फैसला किया है।
15 दिन से ज्यादा चीनी नहीं रख सकेंगे बड़े उपभोक्ता
1 सितंबर 2026 से 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक खपत वाले बड़े उपभोक्ताओं को 15 दिन से ज्यादा का चीनी स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। इसमें मिठाई विक्रेता और शीतल पेय निर्माता जैसे बड़े उपभोक्ता शामिल हैं।
सरकार के इस कदम का उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और अनावश्यक स्टॉक के जरिए कीमतों में होने वाली तेजी पर लगाम लगाना है।
मिठाइयों और पेठे के दाम बढ़ने की आशंका
चीनी महंगी होने का सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ रहा है। कारोबारियों के मुताबिक उत्पादन लागत बढ़ने के कारण त्योहारों के दौरान मिठाइयों के दाम बढ़ सकते हैं।
स्वीट्स एंड नमकीन कारोबारियों का कहना है कि चीनी की कीमत में लगातार बढ़ोतरी से उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ा है। वहीं पेठा कारोबारियों के अनुसार, चीनी की कीमत बढ़ने से पेठा बनाने की लागत भी काफी बढ़ गई है। ऐसे में आने वाले त्योहारों में मिठाइयां और मीठे पकवान महंगे हो सकते हैं।
त्योहारों के बजट पर पड़ेगा असर
रक्षाबंधन से लेकर दिवाली तक मिठाइयों की मांग बढ़ने वाली है। ऐसे में चीनी की कीमतों में यह उछाल मध्यम वर्गीय परिवारों के त्योहारों के बजट को प्रभावित कर सकता है। यदि कीमतों में तेजी जारी रहती है तो मिठाई, पेठा और अन्य चीनी आधारित उत्पादों के दाम भी बढ़ने की संभावना है।
