अमृतसरी कुलचा, लस्सी और फ्रूट क्रीम की महक से खुशबूदार हुई भारत की संसद
चुग की मेहमान नवाजी में सभी दलों के सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों ने चखा अमृतसर के स्वाद का दीदार\
New Delhi: भारत की संसद में मंगलवार को अमृतसर की खुशबू और पंजाब की दिलदार मेहमाननवाज़ी का रंग देखने को मिला। भाजपा के राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने संसद परिसर में साथी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों के लिए अमृतसरी कुलचा, लस्सी और स्वादिष्ट फ्रूट क्रीम सहित पंजाब के पारंपरिक व्यंजनों की दावत का आयोजन किया। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने शामिल होकर अमृतसर के मशहूर स्वाद का आनंद लिया।
इस विशेष अवसर पर NDA के सहयोगी दलों के साथ-साथ कांग्रेस, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), शिरोमणि अकाली दल और बीजू जनता दल सहित विभिन्न दलों के सांसद उपस्थित रहे। तेलुगु देशम पार्टी और AIADMK के सदस्यों ने भी अमृतसरी व्यंजनों का स्वाद लिया। इस दौरान संसद परिसर में राजनीतिक मतभेदों से अलग पंजाब की संस्कृति, खान-पान और मेहमाननवाज़ी की एक खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली।
इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, जेपी नड्डा और अरुण सिंह सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे। वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न दलों के सांसदों ने अमृतसरी कुलचे, लस्सी और फ्रूट क्रीम का आनंद लिया और पंजाब के पारंपरिक स्वाद की सराहना की।
तरुण चुग ने कहा कि अमृतसर सिर्फ श्री हरमंदिर साहिब और अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि अपने खाने और दिल खोलकर मेहमाननवाज़ी के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। अमृतसरी कुलचा और लस्सी में केवल स्वाद नहीं, बल्कि अमृतसर की मिट्टी की खुशबू और वहां के लोगों का अपनापन भी है।
चुग ने कहा कि संसद भारत की विविधता का सबसे बड़ा मंच है, जहां देश के अलग-अलग राज्यों, भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं का प्रतिनिधित्व होता है। ऐसे अवसर इस विविधता को उत्सव में बदल देते हैं। अमृतसर का स्वाद संसद तक लाना उनके लिए पंजाब की संस्कृति और अपनी विरासत को देश के सामने रखने का एक प्रयास है।
चुग ने जोड़ा कि पंजाब की पहचान उसकी दिलदारी और मेहमाननवाज़ी से है। अमृतसर में मेहमान के लिए सिर्फ खाना नहीं सजाया जाता, बल्कि पूरे दिल से सत्कार किया जाता है। आज संसद में भी यही अमृतसरी जज़्बा दिखाई दिया। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं और दलों के नेताओं ने एक साथ बैठकर पंजाब के स्वाद का आनंद लिया।
उन्होंने कहा कि राजनीति में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन भारत की संस्कृति हमें साथ बैठना और एक-दूसरे की परंपराओं का सम्मान करना सिखाती है। अमृतसरी कुलचे और लस्सी की इस दावत ने इसी भारतीय भावना को और मजबूत किया।
