Rampur: राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामपुर में उर्दू विभाग एवं ख़ुसरो फ़ाउंडेशन, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में पुस्तक-चर्चा एवं विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ख़ुसरो फ़ाउंडेशन, नई दिल्ली के संयोजक डॉ. हफ़ीज़ुर्रहमान ने मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सुनीता ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन उर्दू विभाग की अध्यक्ष डॉ. रज़िया परवीन ने कुशलतापूर्वक किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. हफ़ीज़ुर्रहमान द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर संगीत विभाग के अध्यक्ष डॉ. भूपेंद्र कुमार ने छात्राओं एवं शोधार्थियों के साथ मुख्य अतिथि के स्वागत में शानदार स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में मनमोहक वातावरण उत्पन्न कर दिया।
इस अवसर पर उर्दू विभाग के शिक्षक डॉ.उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ.रज़िया परवीन ने डॉ. हफ़ीज़ुर्रहमान तथा ख़ुसरो फ़ाउंडेशन की शैक्षिक, साहित्यिक एवं सामाजिक सेवाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्तित्व की महानता का आकलन केवल उसके ज्ञान, विद्वत्ता अथवा पद से नहीं किया जाता, बल्कि इस बात से होता है कि उसने अपने ज्ञान, विचार और क्षमताओं का उपयोग समाज के कल्याण के लिए किस सीमा तक किया है। डॉ. हफ़ीज़ुर्रहमान इसी दृष्टि से एक सम्माननीय व्यक्तित्व हैं। उन्होंने ज्ञान और साहित्य को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का माध्यम न बनाकर राष्ट्रीय एकता, मानवता, अंतरधार्मिक सद्भाव तथा भारत की साझा संस्कृति एवं समन्वित सांस्कृतिक परंपरा को मजबूत करने के लिए अपनी बौद्धिक एवं रचनात्मक सेवाएँ समर्पित की हैं। उर्दू, हिंदी, फ़ारसी और अंग्रेज़ी जैसी भाषाओं पर उनकी गहरी पकड़ ने उनके विचारों को व्यापक स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम में ख़ुसरो फ़ाउंडेशन की तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों ‘एक मोड़ पर’, ‘राख में दबी चिंगारी’ तथा ‘Muslim Women: A Manifesto for Change’ पर विस्तार से चर्चा की गई।
डॉक्टर इफ्तिखार अहमद कादरी में मुख्य अतिथि की जीवन से संबंधित हर पहलुओं पर विस्तार से बात की और उनकी खूबियों से छात्राओं को अवगत कराया कि किस तरह देश की एकता और अखंडता के लिए तत्पर रहते हैं।
उर्दू विभाग की शोधार्थी लाइबा महबूब ने ‘राख में दबी चिंगारी’ पर सारगर्भित एवं विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की।
मुख्य अतिथि डॉ. हफ़ीज़ुर्रहमान ने अपने प्रभावशाली एवं प्रेरणादायक व्याख्यान में साहित्य, ज्ञान, संस्कृति और सूफ़ी दर्शन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिन देशों में महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त हैं, भारत भी उन देशों में शामिल है। आज भारतीय महिलाओं ने अपनी प्रतिभा और क्षमता के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया है कि वे देश के विकास में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तीकरण किसी भी समाज की प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ख़ुसरो फ़ाउंडेशन की नवीनतम पुस्तकों में महिलाओं से जुड़े विभिन्न सामाजिक एवं समकालीन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।
इन पुस्तकों में महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक समस्याओं, वैज्ञानिक चेतना तथा समकालीन सामाजिक विषयों को साहित्य के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस अवसर पर ख़ुसरो फ़ाउंडेशन की ओर से उक्त पुस्तकें छात्राओं को उपहारस्वरूप प्रदान की गईं। साथ ही महाविद्यालय के पुस्तकालय के लिए भी ख़ुसरो फ़ाउंडेशन की ओर से अनेक पुस्तकें भेंट की गईं, ताकि अधिक से अधिक छात्राएँ इन पुस्तकों से लाभान्वित हो सकें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सुनीता ने कहा कि छात्राओं के ज्ञानवर्धन, व्यक्तित्व निर्माण और सकारात्मक सोच के विकास के लिए इस प्रकार के जानकारीपूर्ण एवं रचनात्मक व्याख्यान अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्राओं को समकालीन सामाजिक विषयों को समझने और अपने विचारों को व्यापक दृष्टिकोण देने में सहायता करते हैं।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की बड़ी संख्या में छात्राओं एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के समस्त शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर प्रोफेसर अनिता देवी, प्रोफेसर सबीहा परवीन, डॉ. सोनूपुरी, डॉ. रजनी बाला, डॉ. यामिनी सिंह, डॉ. योगेश कुमार, डॉ. मनोरमा चौहान आदि ने सक्रिय रूप से सहभागिता की।
कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करने का अवसर प्राप्त हुआ।
