ई-संजीवनी ओपीडी से संवर रही गांव-देहात की सेहत: जून तिमाही में दर्ज हुए 1.25 लाख परामर्श, रोजाना 1,600 से अधिक ग्रामीण ले रहे डिजिटल डॉक्टरी सलाह

-आरोग्य मंदिरों में प्रति केंद्र रोजाना औसतन 8 से 9 मरीजों को मिला इलाज, प्रदेश के 4.7 के औसत को पीछे छोड़कर जिले ने दर्ज कराया था उत्कृष्ट प्रदर्शन

-203 आयुष्मान आरोग्य केंद्रों पर सीएचओ के माध्यम से घर बैठे मिल रही विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं; शाहबाद और मिलक ब्लॉक में सर्वाधिक मरीजों ने उठाया योजना का लाभ

Rampur: डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत संचालित ई-संजीवनी ओपीडी योजना के जरिए रामपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की तस्वीर तेजी से बदल रही है। दूरदराज के गांवों में रहने वाले मरीजों को अब विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के लिए जिला अस्पताल या बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं, बल्कि वे अपने गांव के पास ही डिजिटल माध्यम से सीधे डॉक्टरों से जुड़कर मुफ्त इलाज प्राप्त कर रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. दीपा सिंह द्वारा ई-संजीवनी पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक, जिले के 203 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान कुल 1,25,347 टेली-कंसल्टेशन (ऑनलाइन डॉक्टरी परामर्श) प्रदान किए गए थे। इस शानदार प्रदर्शन के बल पर रामपुर ने पूरे प्रदेश और मुरादाबाद मंडल में शीर्ष स्थान हासिल किया था। आंकड़ों के अनुसार, जहां प्रदेश में रोजाना प्रति केंद्र औसतन 4 से 5 मरीजों (4.7) को ही ऑनलाइन परामर्श मिल पा रहा था, वहीं रामपुर में प्रति केंद्र यह आंकड़ा रोजाना औसतन 8 से 9 मरीजों (8.3) का रहा। इस तरह पूरे जिले में रोजाना 1,600 से अधिक मरीज ई-संजीवनी का लाभ उठा रहे हैं। अकेले जून महीने में ही 44,145 ग्रामीण मरीजों को घर के पास ही विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह उपलब्ध कराई गई थी।

ब्लॉकवार प्रदर्शन – शाहबाद और मिलक में सर्वाधिक मरीजों को मिला लाभ
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट का विश्लेषण करें तो जिले के सभी सातों ब्लॉकों में ई-संजीवनी ओपीडी का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। शाहबाद ब्लॉक में 45 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से तिमाही में सर्वाधिक 27,105 परामर्श दिए गए, जिनमें अकेले जून माह में 9,724 परामर्श शामिल रहे। दूसरे स्थान पर रहे मिलक ब्लॉक के 35 केंद्रों के जरिए कुल 22,768 मरीजों को डिजिटल इलाज मिला, जिसमें जून में 8,007 परामर्श दर्ज किए गए। इसके अलावा सैदनगर के 31 केंद्रों से 18,205, बिलासपुर के 28 केंद्रों से 17,294, चमरौआ के 24 केंद्रों से 15,995 तथा स्वार ब्लॉक के 25 केंद्रों से 15,890 मरीजों को परामर्श मिला। सबसे कम 15 केंद्रों वाले टांडा ब्लॉक में भी 8,090 मरीजों ने डिजिटल माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं लीं।

दैनिक परामर्श औसत में चमरौआ और मिलक का बेहतरीन प्रदर्शन
प्रति केंद्र दैनिक परामर्श के मामले में रामपुर का प्रदर्शन राज्य के औसत से काफी बेहतर रहा है। उत्तर प्रदेश का राज्य औसत जहां 4.7 परामर्श प्रतिदिन प्रति केंद्र दर्ज है, वहीं रामपुर में तिमाही का कुल औसत प्रति केंद्र 8.3 और जून महीने का औसत 8.2 रहा। यानी जिले के प्रत्येक आरोग्य मंदिर में रोज औसतन 8 से 9 मरीजों का डिजिटल उपचार किया गया। जून महीने में चमरौआ ब्लॉक प्रतिदिन प्रति केंद्र 9.7 (लगभग 9 से 10 मरीज) के औसत के साथ पूरे जिले में शीर्ष पर रहा। इसके अलावा मिलक ब्लॉक में दैनिक औसत 9.5, जबकि टांडा और शाहबाद ब्लॉकों में 9.0 दर्ज किया गया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल माध्यम से डॉक्टर से परामर्श लेने के प्रति लोगों की स्वीकार्यता और भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

दूरस्थ ग्रामीणों के समय और पैसों की बचत, सीएमओ का विजन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपा सिंह के अनुसार, ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से गांव-देहात के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सामान्य से लेकर गंभीर बीमारियों के परामर्श के लिए दूर नहीं जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों के यात्रा खर्च, समय और दिहाड़ी के नुकसान की सीधी बचत हो रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि ग्रामीण आबादी को बिना किसी रुकावट के डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहें।

क्या है ई-संजीवनी ओपीडी योजना और कैसे दे रही लाभ
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित ई-संजीवनी ओपीडी केंद्र और राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण टेली-मेडिसिन पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के नागरिकों को उनके गांव के पास ही विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श मुफ्त उपलब्ध कराना है। यह व्यवस्था ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर काम करती है। गांव के आयुष्मान आरोग्य मंदिर (स्पोक) में तैनात कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर मरीज के प्राथमिक लक्षण, बीपी, शुगर आदि जांचते हैं। इसके बाद टैबलेट या लैपटॉप से जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में स्थापित डिजिटल कंसल्टेशन हब के विशेषज्ञ डॉक्टरों से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क कराया जाता है। डॉक्टर मरीज से बातचीत कर डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन जारी करते हैं और आरोग्य मंदिर में ही दवाएं उपलब्ध करा दी जाती हैं।

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