पनबस, पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल जारी
कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने समेत लंबित मांगों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
-परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा से आज अहम बैठक, समाधान न हुआ तो हड़ताल होगी अनिश्चितकालीन
-कर्मचारी नेताओं का आरोप— सरकार ने चुनावी वादे पूरे नहीं किए, हर विभाग का कर्मचारी आंदोलन को मजबूर
Amritsar: पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर तीन दिवसीय हड़ताल जारी रखी। कर्मचारियों ने पंजाब सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि कई दौर की बैठकों और आश्वासनों के बावजूद उनकी किसी भी प्रमुख मांग का समाधान नहीं किया गया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया तो यह तीन दिन की हड़ताल अनिश्चितकालीन आंदोलन का रूप ले सकती है।
पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी यूनियन पंजाब के नेता जोध सिंह ने कहा कि कर्मचारियों का लंबे समय से सरकार के साथ संघर्ष चल रहा है, लेकिन आज तक उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ कई बैठकें हुईं, लेकिन उनमें कर्मचारियों के हितों को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक एक भी कच्चे कर्मचारी को नियमित नहीं किया गया है। इसके अलावा आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज किए गए मुकदमों को रद्द करने और ठेका प्रणाली समाप्त करने जैसी मांगों पर भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।
जोध सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने और सभी कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था। कर्मचारियों ने भी सरकार के पक्ष में प्रचार किया और परिवर्तन की उम्मीद में उसका साथ दिया, लेकिन साढ़े चार वर्ष बीत जाने के बाद भी वादे पूरे नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि आज पंजाब का लगभग हर विभाग आंदोलन और धरनों का केंद्र बना हुआ है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने में असफल रही है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अब भी उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। यदि सरकार सकारात्मक फैसला लेती है तो कर्मचारी अपनी हड़ताल वापस लेकर पहले की तरह जनता को परिवहन सेवाएं देना शुरू कर देंगे।
वहीं, पंजाब रोडवेज पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन, अमृतसर-1 के डिपो प्रधान हीरा सिंह ने कहा कि वर्ष 2007 से हजारों कर्मचारी ठेका प्रणाली के तहत काम कर रहे हैं। पिछली सरकारों ने भी उनकी समस्याओं की अनदेखी की, लेकिन मौजूदा सरकार से कर्मचारियों को बड़ी उम्मीदें थीं। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई और न ही कोई स्पष्ट नीति लागू की गई।
हीरा सिंह ने कहा कि केवल परिवहन विभाग ही नहीं, बल्कि सफाई कर्मचारी, मनरेगा कर्मचारी, बिजली विभाग और अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारी भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज चंडीगढ़ में परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ यूनियन की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। यदि इस बैठक में कर्मचारियों की मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं निकलता, तो तीन दिन की हड़ताल को अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार स्पष्ट नीति बनाकर कर्मचारियों की मांगों को लागू नहीं करती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
