Dairy Industry: वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स पर बड़ा दांव, डेयरी कंपनियां इसी रणनीति से बढ़ाएंगी कारोबार
डेयरी सेक्टर में बदल रही है ग्रोथ की रणनीति
नई दिल्ली: भारत का डेयरी उद्योग अब पारंपरिक दूध बिक्री से आगे बढ़कर वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स पर अपना फोकस बढ़ा रहा है। उद्योग से जुड़ी कंपनियों का मानना है कि भविष्य की ग्रोथ दही, पनीर, चीज़, मक्खन, घी, फ्लेवर्ड मिल्क, योगर्ट और अन्य प्रोसेस्ड डेयरी उत्पादों से आएगी।
वैल्यू-ऐडेड पोर्टफोलियो पर कंपनियों का जोर
डेयरी कंपनियां अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही हैं और ऐसे उत्पादों पर निवेश बढ़ा रही हैं, जिनकी बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है। इस रणनीति का उद्देश्य ग्राहकों की बदलती पसंद के अनुरूप नए विकल्प उपलब्ध कराना और बेहतर मुनाफा हासिल करना है।
बदलती उपभोक्ता मांग से मिल रहा बढ़ावा
शहरीकरण, बढ़ती आय और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के कारण उपभोक्ता अब पारंपरिक दूध के साथ-साथ प्रीमियम और वैल्यू-ऐडेड डेयरी उत्पादों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इसी बदलाव को देखते हुए कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल में परिवर्तन कर रही हैं।
मुनाफा बढ़ाने पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि वैल्यू-ऐडेड डेयरी उत्पादों में सामान्य दूध की तुलना में अधिक मार्जिन मिलता है। यही वजह है कि कंपनियां इन उत्पादों के उत्पादन, ब्रांडिंग और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने में निवेश कर रही हैं।
ग्रामीण और शहरी बाजार दोनों पर नजर
डेयरी कंपनियां अपनी रणनीति के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में पहुंच बढ़ाने की योजना पर काम कर रही हैं। आधुनिक रिटेल, ई-कॉमर्स और कोल्ड चेन नेटवर्क के विस्तार के जरिए वैल्यू-ऐडेड उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।
भविष्य की ग्रोथ का बनेगा प्रमुख आधार
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में वैल्यू-ऐडेड डेयरी उत्पाद ही इस क्षेत्र की विकास दर को गति देंगे। इसलिए अधिकांश डेयरी कंपनियां अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करने और नए उत्पाद बाजार में उतारने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही हैं।
