बारिश में गोवंशों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, गो-आश्रय स्थलों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित हों : जिलाधिकारी

  • रिपोर्ट: शाहबाज़ खान

रामपुर: बरसात व जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने जनपद के सभी गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित निराश्रित गोवंशों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं समुचित देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने शासन के निर्देशों के क्रम में संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई करने के लिए कहा, ताकि बारिश के दौरान गोवंशों को किसी प्रकार की असुविधा या जोखिम का सामना न करना पड़े।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि किसी भी गो-आश्रय स्थल पर गोवंश कीचड़ या जलभराव में न रहें। उनके बैठने एवं विश्राम के लिए पर्याप्त सूखी एवं सुरक्षित जगह उपलब्ध कराई जाए। जिन स्थानों पर जलभराव की संभावना है, वहां तत्काल जल निकासी की व्यवस्था कराई जाए तथा आवश्यकतानुसार मिट्टी भराई, खड़ंजा एवं प्लेटफॉर्म का निर्माण कराया जाए।

उन्होंने निर्देशित किया कि गो-आश्रय स्थलों की फर्श, चरही एवं पेयजल व्यवस्था की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। गोवंशों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए तथा पानी की चरही पर शेड एवं उसके आसपास खड़ंजा बिछाने की व्यवस्था भी कराई जाए।
जिलाधिकारी ने गो-आश्रय स्थलों के बाहरी क्षेत्र में सहजन, करौंदा, पाकड़, नीम एवं पीपल जैसे पौधों का रोपण तथा परिसर के भीतर ट्री-गार्ड के साथ छायादार वृक्ष लगाने के निर्देश दिए। साथ ही चारे को सुरक्षित एवं सूखा रखने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, ताकि बरसात के कारण चारा खराब न हो।

उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि अत्यधिक बारिश अथवा बाढ़ जैसी स्थिति में आपदा प्रबंधन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर गोवंशों के लिए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। गो-आश्रय स्थलों पर सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी गोवंशों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए तथा उपचार के लिए आवश्यक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहें। बीमार एवं असक्त गोवंशों को पृथक आइसोलेशन कक्ष में रखकर उनका समुचित उपचार एवं देखभाल की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि बरसात के मौसम में मच्छर एवं मक्खियों से फैलने वाले रोगों की रोकथाम के लिए नियमित रूप से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया जाए। संक्रामक रोगों से बचाव हेतु टीकाकरण एवं कृमिनाशक दवाओं का सेवन भी अनिवार्य रूप से कराया जाए।

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