ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा: अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान का पलटवार, खाड़ी क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण
- रिपोर्ट: सुरजीत सिंह
वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की कोशिशों के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक करते हुए 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय निगरानी प्रणाली, एंटी-शिप मिसाइल क्षमताओं, ड्रोन लॉन्च साइट्स और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरान का जवाबी हमला
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया। ईरानी पक्ष का दावा है कि उसने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए तथा एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जहाजों पर हमले के बाद बढ़ा विवाद
अमेरिका का कहना है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया था, जिसके जवाब में यह सैन्य कार्रवाई की गई। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी हमलों को संघर्षविराम और शांति समझौते का उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
दक्षिणी ईरान में धमाकों की खबरें
ईरानी मीडिया के अनुसार, केशम द्वीप, बंदर अब्बास और सीरिक सहित दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। सरकारी मीडिया ने कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी दी है, हालांकि किसी बड़े नागरिक नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
CENTCOM का बयान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की “भारी कीमत” ईरान को चुकानी होगी। CENTCOM के अनुसार, उसका उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को निशाना बनाने में किया जा सकता है।
राष्ट्रपति ने दौरा बीच में छोड़ा
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की सूचना मिलने के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अपना इराक दौरा बीच में छोड़कर तेहरान लौटने का फैसला किया।
दोनों देशों के बीच ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है।
