Adhik maas Purnima Upvas 2026: 30 मई को रखा जाएगा अधिक मास पूर्णिमा व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

  • रिपोर्ट: प्राची सिंह

अधिक मास पूर्णिमा उपवास 30 मई 2026 को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से सुख-समृद्धि, सौभाग्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और भक्त पूरे श्रद्धाभाव से उपवास रखकर पूजा-अर्चना करते हैं।

अधिक पूर्णिमा उपवास 2026 शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 30 मई 2026, सुबह 11:57 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – 31 मई 2026, दोपहर 02:14 बजे
चंद्रोदय समय – शाम 06:35 बजे

अधिक पूर्णिमा उपवास का महत्व
भविष्य पुराण में वर्णित बत्तीसी पूर्णिमा व्रत के अनुसार यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। इस व्रत की शुरुआत मार्गशीर्ष, माघ या वैशाख पूर्णिमा से की जाती है और इसका समापन भाद्रपद या पौष पूर्णिमा पर होता है। इसे द्वादश पूर्णिमा व्रत भी कहा जाता है। मान्यता है कि सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखने और पूजा-पाठ करने से व्यक्ति के पाप और कर्मों का बोझ कम होता है तथा जीवन में सुख-शांति आती है।

अधिक पूर्णिमा उपवास पूजा विधि
ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिम के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व माना गया है और इसके बाद दान करने की भी परपंरा है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लेने के बाद कलश स्थापना करें और भगवान गणेश की पूजा करें। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें। भक्त दिनभर उपवास रखकर मंत्र जाप करते हैं। विशेष रूप से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।

शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें और व्रत कथा का पाठ करें। जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े, चावल, आटा आदि का दान करें। ब्राह्मण भोजन कराने के बाद फलाहार ग्रहण कर व्रत खोला जा सकता है। बता दें ​31 मई को चंद्रोदय का समय रात 7 बजकर 36 मिनट है। इस दिन तामसिक भोजन, शराब और तंबाकू का सेवन करने से बचना चाहिए।

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