आज रामपुर रज़ा पुस्तकालय में भारतीय दूतावास, सऊदी अरब के समन्वय से राष्ट्रीय संग्रहालय, रियाद (सऊदी अरब) एवं रामपुर रज़ा पुस्तकालय के मध्य पुस्तकालय में संरक्षित अरबी भाषा की पांडुलिपियों एवं कैलीग्राफी की प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, सेमिनार, अनुवाद एवं शोध से संबंधित विषयों पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
इस अवसर पर रामपुर रज़ा पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय केवल पांडुलिपियों एवं पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि भारत की साझा सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा का जीवंत केंद्र है। उन्होंने कहा कि भारत और अरब जगत के मध्य सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं ज्ञान संबंधों को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल पांडुलिपि संरक्षण, शोध, अनुवाद, डिजिटलीकरण एवं सांस्कृतिक संवाद के क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी तथा भारत और सऊदी अरब के मध्य सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगी। कहा कि भारत एक जीवंत परंपराओं का देश है, जिनका इतिहास पाँच हजार वर्षों से भी अधिक पुराना है। हमें इन समृद्ध परंपराओं से पुनः जुड़ने की आवश्यकता है। लाइब्रेरी में ये परंपराएँ पांडुलिपियों, चित्रकलाओं, सुलेख तथा अन्य दुर्लभ धरोहरों के रूप में संरक्षित हैं। इन ज्ञान एवं संस्कृति की जीवंत परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रसारित एवं प्रोत्साहित करते हुए रामपुर रज़ा लाइब्रेरी स्वयं को कला, शिक्षा एवं धरोहर संरक्षण के एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करेगी। रामपुर के नवाबों के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि नवाबों ने इस किले की सुंदर एवं ऐतिहासिक इमारतों को ज्ञान की उत्कृष्टता जैसे महान उद्देश्य के लिए समर्पित किया। कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय, रामपुर रियासत के भारत संघ में विलय के पश्चात एक ट्रस्ट के अधीन आ गया था। तत्पश्चात वर्ष 1975 में भारत सरकार ने संसद द्वारा पारित रामपुर रज़ा पुस्तकालय अधिनियम 1975 के माध्यम से इसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया। इस पुस्तकालय का संचालन रामपुर रज़ा पुस्तकालय बोर्ड द्वारा किया जाता है, जिसके अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के माननीय राज्यपाल होते हैं। पुस्तकालय को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पूर्ण वित्तीय सहायता प्राप्त होती है, साथ ही राजस्व के अन्य स्रोत भी हमारे लिए उपलब्ध हैं। पुस्तकालय में अरबी संग्रह की जानकारी देते हुए कहा कि पुस्तकालय संग्रह में सबसे पुरानी पाण्डुलिपि हज़रत अली/ इमाम अली द्वारा पार्चमेंट पर हस्लिखित 7वीं सदी की कुरान है।
बैठक के दौरान भारत और सऊदी अरब के मध्य साझा सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने हेतु अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। रामपुर रज़ा पुस्तकालय की ओर से सऊदी अरब के राष्ट्रीय संग्रहालय के साथ संयुक्त संग्रहालय प्रदर्शनी आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें पुस्तकालय के दुर्लभ एवं उत्कृष्ट संग्रह — विशेष रूप से कला की उत्कृष्ट कृतियाँ, दुर्लभ पांडुलिपियाँ तथा अरबी सुलेख — प्रदर्शित किए जाएंगे। प्रस्तावित प्रदर्शनी भारत और अरब जगत के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करेगी।
बैठक में संग्रहालय विज्ञान (Museology) एवं पांडुलिपि संरक्षण के क्षेत्र में विशेषज्ञों के आदान-प्रदान पर भी सहमति व्यक्त की गई। इसके अंतर्गत संरक्षण तकनीकों, संग्रह प्रबंधन, डिजिटलीकरण तथा अभिलेखीकरण संबंधी ज्ञान को साझा करने की दिशा में संयुक्त कार्यक्रम संचालित किए जाने पर विचार किया गया।
इसके अतिरिक्त इतिहास, भाषा, साहित्य, दर्शन, सामाजिक विज्ञान तथा सांस्कृतिक अध्ययन जैसे विषयों पर संयुक्त शोध, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, सम्मेलनों एवं व्याख्यानमालाओं के आयोजन का प्रस्ताव भी रखा गया। दोनों संस्थानों ने अंतर्विषयक अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा विद्वानों एवं शोधकर्ताओं के बीच शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में अनुवाद परियोजनाओं पर विशेष चर्चा हुई। रामपुर रज़ा पुस्तकालय ने अपने संग्रह में उपलब्ध इतिहास, दर्शन, आध्यात्मिकता, खगोल विज्ञान, तिब्ब (पारंपरिक चिकित्सा) एवं सूफ़ीवाद से संबंधित चयनित अरबी, फ़ारसी, संस्कृत एवं उर्दू पांडुलिपियों का हिंदी, अंग्रेज़ी एवं अरबी भाषाओं में अनुवाद कराने हेतु सहयोग का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
बैठक में भारतीय दूतावास के साहित्य सलाहकार श्री रमेश कुमार झा, सऊदी अरब के राष्ट्रीय संग्रहालय से श्री खालिद बासिरी, श्री खलूद अल्शोशन, मिस नोहा अल्कधि एवं मिस हनादी अल्हर्थी, रामपुर रज़ा पुस्तकालय कि ओर से निदेशक डॉ पुष्कर मिश्र, पूर्व पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी डॉ अबुसाद इस्लाही, वरिष्ट तकनीकी रेस्टोरर श्री सय्यद तारिक अज़हर, संरक्षणकर्ता श्रीमती सनम अली खान उपस्थित रहे।
बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई तथा दोनों पक्षों ने भविष्य में निरंतर सहयोग एवं संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
