गुस्ताखी माफ हरियाणा -पवन कुमार बंसल
“चल संन्यासी मंदिर में, मेरी चुड़िया तेरा चिमटा साथ बजावेंगे…”
अर भूपिंदर हुड्डा अर मनोहर लाल एक-दूजे नै राजनीति तै संन्यास लेण की सलाह दे रह्या सैं।
प्रदेश की जनता कहवे सै — भाई दोन्नूं एक्के बार संन्यास ले लो, हरियाणा का भला हो जागा।
एक साहब तो सीएम रहते बिल्डरां नै खूब मालामाल कर गए।
आज भी 37 एमएलए के नेता सैं, पाँच सांसद सैं, फेर भी भीगी बिल्ली बनकै बैठे सैं।
हुड्डा साहब, अब तो एमएलए भी बन लिए, सांसद भी रह लिए, दो बार सीएम भी बन लिए, अर अब नेता विपक्ष भी हो लिए।
अब बुढ़ापे में पोत्यान नै खिलाओ अर आराम करो।
दूजे मनोहर लाल साहब — मोदी जी नै खिचड़ी खिलाण का ईनाम मिल्या, दो बार सीएम बन गए अर अब केंद्र में भी बड़े वजीर सैं।
पर सीएम रहते हरियाणा का बंटाधार कर दिया।
अपने चहेते अफसरां नै मालामाल कर दिया अर जनता पे गुर्राते रहे।
अब भाई संन्यास ले लो।
आपके पास पोता-पोती खिलाण खातर तो कोई सै ना, तो आराम करो अर अपने चेले जवाहर के संग शाम कटाओ।
अर उधर हरियाणा में आपकी मित्र मंडली आजकल विरह के गीत गावै सै —
“छोड़ गए बालम हमें हाय अकेला छोड़ गए…”
क्यूँकि इब नायब सैनी तो घास भी ना डालदा।
