गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
जब वाजपेयी ने रतन लाल कटारिया से कहा — “खरगोश मर गया”
किस्सा 2004 का है। Atal Bihari Vajpayee सहित पार्टी के सभी बड़े नेता इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि लोकसभा चुनाव समय से पहले कराए जाएं या नहीं। ज्यादातर नेताओं की राय थी कि “इंडिया शाइनिंग” का असर है और इसका फायदा उठाया जाना चाहिए।
उसी बैठक में Rattan Lal Kataria भी मौजूद थे। उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा सुनाया।
उन्होंने कहा कि एक बार एक खरगोश चलती कार के सामने आ गया। खरगोश इधर-उधर भागता रहा, लेकिन कोई फैसला नहीं कर पाया और आखिरकार कार के नीचे कुचलकर मर गया।
कटारिया की यह बात सुनते ही वाजपेयी बोले — “फैसला हो गया।”
इसके बाद समय से पहले चुनाव घोषित कर दिए गए। हालांकि बाद में “इंडिया शाइनिंग” की हवा निकल गई और चुनाव परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।
कुछ समय बाद एक कार्यक्रम में वाजपेयी ने दूर खड़े कटारिया को बुलाया। कटारिया को लगा कि शायद वाजपेयी उन्हें उलाहना देंगे।
लेकिन वाजपेयी मुस्कुराए और बोले —
“ऐ कटारिया… खरगोश मर गया।”
Narendra Modi से भी उनके बेहद करीबी संबंध थे। कई बार मोदी ने बन्तो कटारिया के हाथ का बना खाना खाया था।
कटारिया हर महफिल की रौनक हुआ करते थे।
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और हमारे पाठक एल. एम. मेहता का कहना है कि वे अपनी अंबाला नियुक्ति के समय से कटारिया को जानते थे और वे वास्तव में बेहद डाउन टू अर्थ इंसान थे।
