हरियाणा के सीएम और उनकी पत्नियों का प्रशासन में हस्तक्षेप- जब सीएम भजन लाल ने डीसी हिसार को कहा “जसमा(मैडम भजन लाल) का फ़ोन सुन लियो करियो मने पूछ के..

गुस्ताखी माफ हरियाणा- पवन कुमार बंसल

हरियाणवी तड़का

हरियाणा की राजनीति में एक टाइम ऐसा भी था, जब मुख्यमंत्री तो एक तरफ, उनकी धर्मपत्नी और छोरे भी अफसरशाही में अपना रौब झाड़ते थे। कई डीसी, एसपी और अफसर इस बात तै परेशान रहवें कि “असल आदेश किसका मानें?”

चर्चे भजन लाल और उनकी पत्नी जसमा देवी के। हिसार के डीसी साहब तै तो हालत पतली हो ली थी। मैडम जसमा का फोन आ जाया करे—
“यो काम कर दो, वो बंदे की मदद कर दो, फलाणे का ट्रांसफर कर दो।”

एक दिन डीसी हिसार नै हिम्मत करके सीधे सीएम साहब तै कह दिया—
“सर, मैडम के फोन बहुत आवें सैं, समझ ना आवे के करां।”

अब भजन लाल भी बड़े हाजिरजवाब माणस थे। मुस्करा कै बोले—
“डीसी साहब, जसमा मैडम की सुन लिया करो… पर करना मुझ तै पूछ कै।”

बस फेर क्या था—
मैडम भी खुश, डीसी भी खुश, अर सरकार भी चलती रही।

भजन लाल के दो रतन — दुड्डा अर द्वारका — भी कई बार अफसरां नै फोन ठोक दिया करदे थे। उस जमाने में कई अफसर कहें सैं कि असली टेंशन फाइल तै ना, फोन तै होया करदी थी।

दूसरी तरफ बंसी लाल और देवी लाल की घरवालियां सीधी-साधी मानी जाती थीं। राजनीति तै दूर ही रह्या करदी थीं।

मनोहर लाल खट्टर की तो पत्नी ही ना थी, इसलिए “मैडम फोन” का सवाल ही खत्म।

अर नायब सिंह सैनी की धर्मपत्नी भी प्रशासन में दखल ना देती बताई जाती हैं।

ओम प्रकाश चौटाला की पत्नी भी अफसरां नै फोन ना करदी थीं, लेकिन उनके लाल जरूर कई बार अफसरां नै हड़काण की खबरां में रहवे।

अब बात करें आशा हुड्डा की —
कांग्रेस राज में आशा मैडम का अलग ही दबदबा माना जाता था। अफसर भी समझ जाया करदे थे कि “मैडम की बात हल्के में ना लेणी।”

बाकी पुराने मुख्यमंत्री जैसे राव बिरेंद्र सिंह, हुक्म सिंह, बनारसी दास गुप्ता और भगवतदयाल शर्मा की पत्नियां प्रशासनिक मामलों तै दूर ही रह्या करदी थीं।

दुमछला:
हरियाणा की राजनीति में कुर्सी एक आदमी के नाम की होवे सै, पर असर कई बार पूरे कुनबे का चल्या करे सै। अफसर भी समझदार हो लिए — “फोन सबकी सुनो, पर आदेश सोच-समझ कै मानो।”

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