रामपुर रज़ा पुस्तकालय में आज “विकास एवं योजना संबंधी सलाहकार समिति” की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुस्तकालय के दीर्घकालिक विकास, आधुनिकीकरण, सांस्कृतिक संरक्षण तथा वैश्विक स्तर पर संस्थान को स्थापित करने से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण एजेंडा बिंदुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
इस अवसर पर पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने बैठक को प्रारंभ करते हुए कहा कि दिनांक 15 अक्टूबर 2024 को राज्यपाल की अध्यक्षता में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री की भावना एवं संकल्प को पूर्ण करने हेतु रामपुर किले की सम्पूर्ण भूमि एवं भवन रामपुर रज़ा लाइब्रेरी को हस्तांतरित किए जाएंगे। इसी क्रम में, हमने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को रामपुर किले का विस्तृत सर्वेक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दायित्व सौंपा है। साथ ही, रामपुर रज़ा पुस्तकालय के दोनों प्रमुख भवनों का संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की द्वारा प्रारम्भिक रूप से पूर्ण कर लिया गया है। उनकी अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत हम संरक्षण एवं प्रबंधन योजना की प्रक्रिया प्रारम्भ करेंगे, जिसके अंतर्गत इन भवनों का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन कार्य किया जाएगा। कहा कि लोक निर्माण विभाग द्वारा किले के कुछ भवनों को असुरक्षित घोषित किया गया था, जिनमें कुछ शैक्षणिक संस्थान संचालित हो रहे थे। इन संस्थानों को अब अन्य स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। किले के कई भवन ऐतिहासिक महत्व के हैं। यदि ये भवन रामपुर रज़ा पुस्तकालय को प्राप्त हो जाते हैं, तो हम इन भव्य धरोहर इमारतों का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन भी प्रभावी ढंग से कर सकेंगे। कहा कि भारत एक जीवंत परंपराओं का देश है, जिनका इतिहास पाँच हजार वर्षों से भी अधिक पुराना है। हमें इन समृद्ध परंपराओं से पुनः जुड़ने की आवश्यकता है। लाइब्रेरी में ये परंपराएँ पांडुलिपियों, चित्रकलाओं, सुलेख तथा अन्य दुर्लभ धरोहरों के रूप में संरक्षित हैं। इन ज्ञान एवं संस्कृति की जीवंत परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रसारित एवं प्रोत्साहित करते हुए रामपुर रज़ा लाइब्रेरी स्वयं को कला, शिक्षा एवं धरोहर संरक्षण के एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करेगी। कहा कि आज हम इस समिति की प्रथम बैठक आयोजित कर रहे हैं। यह रामपुर रज़ा लाइब्रेरी के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि इतने प्रतिष्ठित एवं विद्वान महानुभाव हमारे साथ जुड़े हैं। हमारे इस व्यापक विज़न को राज्यपाल द्वारा अनुमोदित किया गया है तथा आज की बैठक का एजेंडा उसी दृष्टि को आगे बढ़ाने हेतु निर्धारित किया गया है। रामपुर के नवाबों के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि नवाबों ने इस किले की सुंदर एवं ऐतिहासिक इमारतों को ज्ञान की उत्कृष्टता जैसे महान उद्देश्य के लिए समर्पित किया। कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय, रामपुर रियासत के भारत संघ में विलय के पश्चात एक ट्रस्ट के अधीन आ गया था। तत्पश्चात वर्ष 1975 में भारत सरकार ने संसद द्वारा पारित रामपुर रज़ा पुस्तकालय अधिनियम 1975 के माध्यम से इसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया। इस पुस्तकालय का संचालन रामपुर रज़ा पुस्तकालय बोर्ड द्वारा किया जाता है, जिसके अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के माननीय राज्यपाल होते हैं। पुस्तकालय को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पूर्ण वित्तीय सहायता प्राप्त होती है, साथ ही राजस्व के अन्य स्रोत भी हमारे लिए उपलब्ध हैं।
बैठक में समिति के समक्ष रामपुर किला परिसर की भूमि को पुस्तकालय विस्तार हेतु प्रदान करने के लिए रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने संबंधित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान जिलाधिकारी महोदय द्वारा अवगत कराया गया कि पुस्तकालय के विस्तार हेतु चरणबद्ध योजना तैयार की जा रही है और इसी क्रम में किला परिसर के कुछ भवन खाली करा लिए गए हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित भी किया कि पूर्णतः खाली कराए जा चुके भवनों का तत्काल रामपुर रज़ा पुस्तकालय के पक्ष में हस्तांतरण सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में सभी सदस्यों के द्वारा पुस्तकालय को विश्वस्तरीय ज्ञान, संस्कृति एवं शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अनेक महत्त्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की गई। साथ ही समिति ने पुस्तकालय के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक महत्व को ध्यान में रखते हुए भविष्य की व्यापक कार्ययोजना पर अपने सुझाव एवं मार्गदर्शन प्रदान किए।
बैठक में सार्वजनिक निजी सहभागिता मॉडल के माध्यम से पुस्तकालय के आधुनिकीकरण, डिजिटल अवसंरचना के विकास, पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, शोध सुविधाओं के विस्तार तथा राष्टीय अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से सहयोग बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। इस मॉडल के अंतर्गत आधुनिक डिजिटल प्रयोगशाला, संरक्षण केंद्र, सांस्कृतिक परिसर एवं वैश्विक शोध सुविधाओं के विकास की योजना पर सुझाव प्रस्तुत किये गए।
बैठक में रामपुर रज़ा पुस्तकालय को एक प्रमुख पर्यटन एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रस्तावित योजना के अंतर्गत पुस्तकालय एवं रामपुर किला परिसर को सांस्कृतिक पर्यटन, प्रदर्शनी, शोध, साहित्यिक तथा शैक्षणिक गतिविधियों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। सदस्यों ने इस परियोजना को और अधिक उत्कृष्ट एवं प्रभावी बनाने हेतु अपने महत्वपूर्ण सुझाव एवं विचार प्रस्तुत किए। साथ ही, डिजिटलीकरण एवं वर्चुअल टूर जैसी आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से देश-विदेश के शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं पर्यटकों को जोड़ने की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में रामपुर रज़ा पुस्तकालय को मुख्यता प्रदान करते हुए रामपुर शहर में पर्यटन योजना बनने पर भी चर्चा हुई। समिति ने माना कि पुस्तकालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व का एक प्रमुख सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक केंद्र है, जहाँ देश-विदेश से शोधार्थी एवं विद्वान अध्ययन हेतु आते हैं। ऐसे में पर्यटन योजना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रस्ताव के माध्यम से पुस्तकालय की व्यापक संपर्क व्यवस्था, पर्यटन गतिविधियों एवं जनसहभागिता को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा व्यक्त की गई। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि पर्यटन को बढ़ावा देने तथा विद्वानों के लिए आवासीय सुविधाएँ उपलब्ध कराने हेतु किला परिसर को रामपुर रज़ा लाइब्रेरी में सम्मिलित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
विशाल कुमार, कार्यकारी अभियंता, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, बरेली ने अवगत कराया कि रामपुर रज़ा लाइब्रेरी एवं किला परिसर के विकास हेतु सर्वेक्षण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा अब मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।
बैठक में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों एवं यूनेस्को से संबद्ध संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाने तथा अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक अभिलेख संरक्षण केंद्र की स्थापना पर भी चर्चा हुई। इस केंद्र के माध्यम से दुर्लभ पांडुलिपियों एवं सांस्कृतिक धरोहरों का डिजिटलीकरण, संरक्षण, अभिलेखीकरण एवं वैश्विक शोध सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में आधुनिक एलईडी आधारित प्रदर्शन प्रणाली, डिजिटल प्रदर्शन प्रणाली, परस्पर संवादात्मक प्रदर्शनी तकनीक एवं थीम आधारित गैलरियाँ विकसित करने हेतु सुझाव प्रस्तुत किये गए , जिससे आगंतुकों एवं शोधार्थियों को बेहतर अनुभव प्राप्त हो सके। साथ ही विभिन्न भाषाओं एवं भारतीय ज्ञान परंपराओं को समर्पित एक विशेष थीम संग्रहालय विकसित करने की भी योजना रखी गई। समिति ने इस संस्थान को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, सांस्कृतिक उत्सव, अकादमिक सहयोग एवं वैश्विक शोध गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाने पर बल दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि यह पहल नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान, संस्कृति एवं विरासत से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बैठक में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने सहभागिता की, जिनमें कपिल मोहन (सेवानिवृत्त आईएएस), पूर्व अपर मुख्य सचिव, पर्यटन विभाग, कर्नाटक सरकार अजय कुमार द्विवेदी, आईएएस, जिला मजिस्ट्रेट, रामपुर; प्रो. कय्यूम हुसैन, पूर्व कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर; डॉ. स्वाति मित्रा, सलाहकार, टाटा अक्विला हाएट्स, बैंगलोर; डॉ. शिव नारायण कालिया, संस्थापक, निदेशक एवं वरिष्ठ रणनीतिकार, द इंडियन थिंक टैंक, नई दिल्ली ; प्रो. ममता शर्मा, प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज, गोंडा; तथा विशाल कुमार, कार्यकारी अभियंता, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, बरेली एवं रामपुर जिले के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बैठक के उपरांत समिति के सदस्यों द्वारा पुस्तकालय के भव्य दरबार हॉल में दुर्लभ कलाकृतियों की विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।
