गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
अरे भई, आजकल EVM बिल्कुल एक प्रेग्नेंट लेडी जैसी हो गई है—
सब लोग बाहर खड़े हैं, ICU के बाहर, बस इंतज़ार में है कि आखिर निकलेगा क्या।
अगर नॉर्मल डिलीवरी हो जाए, तो लोग कहेंगे
“Mamata Banerjee ने फिर कमाल कर दिया।”
लेकिन अगर मामला थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड हो जाए, सीज़ेरियन जैसा,
तो धीरे से कान में फुसफुसाहट होती है,
“लगता है बीजेपी को इंटरवीन करना पड़ा।”
अब पूरा बंगाल हाथ बाँध के बैठा है,
इंतज़ार में कि ‘डॉक्टर’ ज्ञानेश
बाहर आए और बताए कि ‘लड़का हुआ या लड़की।’
तब तक चाय ठंडी हो रही है,
पर माहौल गरम होता जा रहा है,
और हर चौपाल का एक्सपर्ट दो-दो बार रिज़ल्ट सुना चुका है।
गुस्ताखी माफ़…
हमारी देसी समझ में सस्पेंस ये नहीं है कि कौन जीतेगा—
सस्पेंस तो ये है कि डिलीवरी कैसे होगी।
