महिलाओं के अधिकारों पर कांग्रेस, सपा विपक्ष का विरोध दुर्भाग्यपूर्ण :- केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा
कांग्रेस,सपा, विपक्ष ने देश की आधी आबादी के साथ किया विश्वासघात :- बी.एल. वर्माविपक्ष ने फिर साबित किया, महिलाओं के मुद्दे पर भरोसे लायक नहीं :- बी.एल. वर्मामहिलाओं को उनका अधिकार देने में बाधा बनना दुर्भाग्यपूर्ण :- बी.एल. वर्मा
बदायूँ :- बदायूँ स्थित फॉर लीफ होटल में विपक्ष द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध के मुद्दे पर आयोजित प्रेस वार्ता को माननीय केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने संबोधित किया।
केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा 16 और 17 अप्रैल को संसद में जो घटनाक्रम हुआ, उसने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों की महिला-विरोधी मानसिकता को पूरी तरह उजागर कर दिया है। इन दलों ने महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध कर देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात किया है।उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है। जो दल इस ऐतिहासिक अवसर में बाधा डाल रहे हैं, उन्हें आने वाले समय में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा और बढ़ेगा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते ने कहा समाजवादी पार्टी जैसे दल कोटा के भीतर धर्म-आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर पूरी प्रक्रिया को टालने का प्रयास कर रहे हैं, जो तुष्टिकरण और ध्यान भटकाने का एक बहाना मात्र है। आगे कहा भारतीय जनता पार्टी महिलाओं के सशक्तिकरण और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए इन महिला-विरोधी ताकतों के खिलाफ मजबूती से संघर्ष करती रहेगी।
उन्होंने आगे कहा कि 16 और 17 अप्रैल को संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा देश के लोकतांत्रिक भविष्य और महिलाओं की भागीदारी के लिए एक ऐतिहासिक अवसर था। लेकिन इन दो दिनों में केवल एक विधेयक ही नहीं गिरा, बल्कि विपक्षी दल देश की आधी आबादी की नजरों में भी गिर गए। आगे कहा भारतीय जनता पार्टी संसद में विपक्ष के इस शर्मनाक, अलोकतांत्रिक और महिला-विरोधी आचरण की कड़ी निंदा करती है। इन दलों ने केवल विधेयकों का विरोध नहीं किया, बल्कि देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के साथ विश्वासघात किया है।उन्होंने कहा इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि जब भी महिलाओं को निर्णय-निर्माण में समान भागीदारी देने की बात आती है, ये दल राजनीतिक बहानों और देरी का सहारा लेते हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा दशकों तक महिलाओं को संसद और विधानसभाओं से दूर रखने की सच्चाई एक बार फिर सामने आई है। आगे कहा ये दल लोकतंत्र के रक्षक होने का दिखावा करते हैं, लेकिन वास्तव में संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ और तुष्टिकरण के कारण महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर कर रहे हैं। आगे कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने स्पष्ट किया है, कि यह राजनीति का समय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में निर्णय लेने का समय है। देश की आधी आबादी को उनका अधिकार देना आवश्यक है, जिसे कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने दशकों तक रोके रखा। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा है कि जब सभी दल एक साथ आते हैं, तो ऐसे मुद्दे राजनीतिक नहीं रह जाते, बल्कि देश के हित में निर्णय का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने सभी सांसदों से व्यक्तिगत और दलगत हितों से ऊपर उठने की अपील की। उन्होंने कहा जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था, तब विपक्षी दलों ने चुनावी दबाव में उसका समर्थन किया, लेकिन जब वास्तव में महिलाओं को अधिकार देने का समय आया, तो उनकी महिला-विरोधी सोच खुलकर सामने आ गई।
उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेतावनी दी है कि देश की महिलाएं अब मूक दर्शक नहीं हैं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं और चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। आज लाखों महिलाएं गांवों में पंचायत स्तर पर सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रही हैं और निर्णय ले रही हैं, और अब वे संसद और विधानसभाओं में भी अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में इस ऐतिहासिक अवसर को टालना केवल विधायी देरी नहीं, बल्कि सामाजिक और लोकतांत्रिक प्रगति का गला घोंटना है, और इसके जिम्मेदार लोगों को हर चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। आगे कहा इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष के झूठ के पूरे ढांचे को ध्वस्त कर दिया है।
उन्होंने आगे कहा इन विधेयकों का मूल उद्देश्य “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” के संवैधानिक सिद्धांत को प्रभावी ढंग से लागू करना है। उन्होंने कहा कि परिसीमन एक संवैधानिक दायित्व है, जिसे लंबे समय से टाला गया, जिससे प्रतिनिधित्व में गंभीर असंतुलन उत्पन्न हुआ है। आगे कहा गृहमंत्री ने साफ किया है, कि कांग्रेस, सपा और उसके सहयोगियों का विरोध प्रक्रिया को लेकर नहीं, बल्कि महिलाओं को आरक्षण देने के मूल विचार के प्रति उनकी असहमति से प्रेरित है, उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है, कि जिन्होंने शाह बानो मामले में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया और तीन तलाक जैसी प्रथा का समर्थन किया, वे महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व देने के विचार को स्वीकार नहीं कर सकते। साथ आगे कहा महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने की इस साजिश में समाजवादी पार्टी ने भी धर्म आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर खतरनाक कदम उठाया है, जबकि भारत का संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नही करता। उन्होंने कहा कांग्रेस सपा, विपक्ष को लगता है, कि वह तकनीकी बहानों से जनता को भ्रमित कर सकता है, लेकिन आज की महिलाएं सब समझती है। साथ ही कहा यह केवल एक विधेयक का विरोध नही था, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रति विपक्ष की हताशा का प्रदर्शन था।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता, सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता, बिल्सी विधायक हरीश शाक्य, जिलाध्यक्ष महिला मोर्चा अमिता उपाध्याय, जिला महामंत्री एमपी सिंह राजपूत, जिला महामंत्री शैलेन्द्र मोहन शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष अनुभव उपाध्याय, जिला मीडिया प्रभारी अचल शर्मा आदि मीडिया बंधु उपस्थित रहे।
