गुस्ताख़ी माफ हरियाणा- पवन कुमार बंसल
हरियाणा की एसीएस, हमारी सजग पाठिका और चर्चित शायरा सुमिता मिश्रा के सौजन्य से—
“यदि कोई आपकी घृणा का अधिकारी है, तो उस पर एक क्षण भी चिंतन या कोसने में व्यर्थ न गँवाइए। उसे उसके कर्मों के दर्पण में स्वयं से साक्षात्कार करने दीजिए। समय और नियति—दोनों अपने-अपने शिलालेख स्वयं रचते हैं।”
दुमछल्ला:
प्रतीत होता है कि मैडम ने जीवन के तीखे तीर कई बार सहे हैं; अब हाल यह है कि घाव भी जैसे उनसे परिचय-सा पा चुके हैं—या यूँ कहें, पीड़ा ने ही उनसे एक स्थायी रिश्ता जोड़ लिया है।
