जब रोहतक के एक चौधरी ने मुख्यमंत्री हूडा से कहा, “यो नौकरी की पर्ची आशा को दे दियो,” चौधरी समझदार था, और उसे पता था कि आशा हूडा को पर्ची मिलते ही नौकरी पक्की समझी जाएगी

गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा—पवन कुमार बंसल

जब चौधरी ने हुड्डा से कहा—“पर्ची आशा को दे दियो”

यह दिलचस्प किस्सा रोहतक के कैनाल रेस्ट हाउस का है। उन दिनों सरकारी नौकरी निकली हुई थी और सिफारिशों का दौर अपने चरम पर था। इसी सिलसिले में कई लोग तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मिलने पहुँचे हुए थे।

इसी भीड़ में एक चौधरी साहब भी अपने बेटे के भविष्य की आस लिए पहुँचे। उन्होंने बड़े अदब से अपने लड़के के नाम की एक पर्ची हुड्डा साहब को थमा दी। हुड्डा ने सामान्य प्रक्रिया के तहत वह पर्ची अपने पी.ए. चोपड़ा को सौंप दी।

लेकिन चौधरी साहब भी ज़माने के देखे-भाले और समझदार इंसान थे। उन्होंने फ़ौरन चोपड़ा से वह पर्ची वापस ली और फिर सीधे हुड्डा साहब को थमा दी।

हुड्डा साहब कुछ हैरान हुए। तभी चौधरी मुस्कुराते हुए बोले—
“साहब, यो पर्ची आशा मैडम नै दे दियो।”

चौधरी की इस बात में छिपा इशारा साफ़ था। उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि किस दरवाज़े से काम बनता है। चोपड़ा के ज़रिये बात बने या न बने, लेकिन “आशा मैडम” तक पर्ची पहुँचने का मतलब क्या होता है—यह चौधरी भली-भाँति जानते थे।

वैसे भी, रोहतक के लोगों की समझदारी और राजनीतिक सूझबूझ का कोई जवाब नहीं।

दुमछला: ओम प्रकाश चौटाला यदि पर्ची अपनी जेब में रखते, तो नौकरी पक्की।

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