ऐलनाबाद, (एम पी भार्गव): बीजेपी की राजनीति विकास के नाम पर नहीं, बल्कि समाज को बांटकर वोट लेने की रणनीति पर चलती है। किसानों, युवाओं या रोजगार जैसे मुद्दों पर कभी स्पष्ट वादे नहीं किए गए। 2019 में प्रधान मंत्री ने किसानों की आय दोगुनी करने की बात जरूर कही थी, लेकिन उस बात को भी चार साल बीत गये अभी तक कुछ नहीं हुआ। इस पर कोई ठोस चर्चा या परिणाम सामने नहीं आया। बेरोजगारी के सवाल पर भी ठोस योजना की जगह “पकोड़े बनाओ” जैसे बयान दिए गए, जिससे यह धारणा और मजबूत होती है कि असली मुद्दों से ध्यान हटाकर भावनात्मक और विभाजनकारी राजनीति को आगे बढ़ाया गया। यह आरोप कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बृजेंद्र सिंह ने यात्रा के दौरान आयोजित जनसभा में लगाए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह के नेतृत्व में निकाली जा रही सद्भाव यात्रा आज 178 वें दिन कालांवाली विधानसभा हलके में प्रवेश कर गई । मंगलवार को कालांवाली हलके के गांव कुरंगावाली से यात्रा की शानदार शुरुआत हुई जहां ग्रामीणों ने यात्रा का जोरदार स्वागत किया । इसके पश्चात गांव सुखचैन, खतरावा, तिलोकेवाला, तारुआना गांव से होते हुए कालांवाली शहर में यात्रा का समापन हुआ । इस मौके पर बलकोर सिंह-पूर्व विधायक, सतोंष बेनीवाल- जिलाध्यक्ष, प्रहलाद सिंह गिल्लाखेडा- पूर्व विधायक, निर्मल सिंह मलड़ी, सुखदेव सिंह बड़ा गुढ़ा, अमनदीप कुरंगावाली, हरदेव सिंह कुरंगावाली, लखविंदर नंबरदार, गुरप्रीत परधान, सुखदीप, मलकीत सिंह गंगा, दलजीत सिंह पंघाल, राजपाल जैलदार रतिया, परगट सिंह, अवतार सिंह-पूर्व चेयरमैन सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे ।
इसके साथ ही यह बृजेंद्र सिंह ने भी आरोप लगाया गया कि बीजेपी हर आंदोलन और हर समुदाय में दरार ढूंढने की कोशिश करती है। किसान आंदोलन के दौरान भी सिख समुदाय के भीतर भेदभाव दिखाने की कोशिश की गई। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि एकजुटता को तोड़ना ही उनकी रणनीति का हिस्सा है, ताकि राजनीतिक लाभ हासिल किया जा सके।
बृजेंद्र सिंह ने अपने भाषण में सिख समुदाय की विशेषताओं की भी सराहना की गई—खासकर उनकी साफगोई और सेवा भाव की। कहा गया कि सिख लोग बात को घुमा-फिराकर नहीं कहते और सेवा के मामले में उनका कोई मुकाबला नहीं है। किसान आंदोलन के दौरान जिस तरह से लंगर और मदद का इंतजाम हुआ, वह इस भावना का सबसे बड़ा उदाहरण बताया गया।
ईस के अलावा हरियाणा की राजनीति के बदलते स्वरूप पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पहले जहां कांग्रेस और लोकदल दो मुख्य धुरी थे, वहीं अब बीजेपी के उभरने के बाद मुकाबला सीधा कांग्रेस और बीजेपी के बीच बताया गया। यह भी कहा गया कि क्षेत्रीय दल बीजेपी जैसी संगठित और विचारधारा आधारित पार्टी का मुकाबला अकेले नहीं कर सकते, क्योंकि बीजेपी एक-एक कर विरोधियों को कमजोर करने की रणनीति अपनाती है।
