अंतरराष्ट्रीय। ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका को एक बड़ा सैन्य नुकसान झेलना पड़ा है। 27 मार्च को सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर तैनात अमेरिकी वायुसेना का E-3 Sentry रडार विमान ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले में नष्ट हो गया। इस घटना से अमेरिका को भारी आर्थिक और सामरिक क्षति हुई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, E-3 Sentry एक ‘एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम’ (AWACS) विमान है, जिसे Boeing ने तैयार किया है। इसकी कीमत लगभग 300 मिलियन डॉलर (करीब 2700 करोड़ रुपये) बताई जाती है। इस विमान को ‘आसमान की आंख’ कहा जाता है, क्योंकि यह दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन गतिविधियों पर नजर रखने में अहम भूमिका निभाता है।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी बेड़े में अब केवल 16 ऐसे विमान बचे हैं, जिनमें से सभी पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं हैं। मध्य-पूर्व में तैनात इन विमानों की संख्या भी सीमित है, जिससे इस नुकसान का प्रभाव और गंभीर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, E-3 Sentry के नष्ट होने से अमेरिका की निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता कमजोर हो सकती है। यह विमान हवाई हमलों के दौरान समन्वय स्थापित करने और आने वाले खतरों का समय रहते पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस संघर्ष के दौरान अमेरिका अब तक 20 से 22 विमान और ड्रोन गंवा चुका है, जिनमें रीपर ड्रोन, एफ-15 फाइटर जेट और केसी-135 टैंकर शामिल हैं। हमले के बाद नष्ट हुए विमान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिनमें विमान का रडार डोम जमीन पर गिरा दिखाई दे रहा है।
वहीं ईरान ने इस हमले में Shahed-136 ड्रोन के इस्तेमाल की पुष्टि की है। ईरानी पक्ष का दावा है कि कम लागत वाले ड्रोन के जरिए महंगे अमेरिकी सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया गया।
इधर, ऐसे ड्रोन की बढ़ती प्रभावशीलता को देखते हुए भारत भी कामिकेज ड्रोन तकनीक पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘प्रोजेक्ट KAL’ और ‘शेषनाग-150’ जैसे स्वदेशी ड्रोन सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, जो गहरे हमले (डीप-पेनेट्रेशन) की क्षमता रखते हैं।
