लखीसराय में कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न रोकथाम पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित

महिला एवं बाल विकास निगम, लखीसराय के तत्वाधान में कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन जिला स्थित मंत्रणा कक्ष में जिला पदाधिकारी श्री मिथिलेश मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।
सर्वप्रथम जिला पदाधिकारी श्री मिथिलेश मिश्र, उप विकास आयुक्त श्री सुमित कुमार, राज्य परियोजना प्रबंधक सह प्रशिक्षक श्रीमती अंकिता कश्यप,जिला प्रोग्राम पदाधिकारी आईसीडीएस सह नोडल पदाधिकारी मिशन शक्ति श्रीमती बंदना पाण्डेय, जिला परियोजना प्रबंधक डॉ मनोज कुमार सिन्हा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुरुआत किया गया।
जिला प्रोग्राम पदाधिकारी आईसीडीएस सह नोडल पदाधिकारी मिशन शक्ति बंदना पाण्डेय ने उपस्थित सभी अतिथियों का अंगवस्त्र व नवपौधा भेंट कर सम्मानित किया गया।
अध्यक्षीय सम्बोधन में जिला पदाधिकारी ने कहा की सरकार महिलाओं के उत्थान व सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। उसी कड़ी में कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न रोकथाम हेतु कार्यस्थल पर स्वच्छ व निर्भीक वातावरण निर्माण करने के उद्देश्य से पोश एक्ट का गठन किया गया है और आज कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि आंतरिक समिति का गठन किया गया है और बचे हुए कार्यस्थल पर भी शीघ्र आंतरिक समिति का गठन करने का निर्देश दिया गया।
राज्य परियोजना प्रबंधक सह प्रशिक्षक श्रीमती अंकिता कश्यप ने बताया कि पोश अधिनियम, 2013 के तहत प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल को महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना है। कानून के अनुसार, नियोक्ताओं के लिए अपने कर्मचारियों को इस अधिनियम के बारे में जागरूक करना और एक आंतरिक समिति का गठन करना अनिवार्य है।
शारीरिक, मौखिक या गैर-मौखिक यौन उत्पीड़न के बारे में जानकारी दिया गया। पीड़ित महिला शिकायत कैसे दर्ज करा सकती है और उसके अधिकार क्या हैं। यह प्रशिक्षण हर उस संस्थान के लिए अनिवार्य है जहाँ 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।
अनुपालन न करने या प्रशिक्षण आयोजित न करने पर कंपनी पर जुर्माना का भी प्रावधान है और उसका व्यापार लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
इसका मुख्य लक्ष्य कार्यस्थल को सुरक्षित बनाना और कर्मचारियों को उनके अधिकारों व जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है। प्रशिक्षण के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाता है कि कौन से व्यवहार जैसे अनुचित स्पर्श, भद्दी टिप्पणियां, या अश्लील चित्र दिखाना ‘यौन उत्पीड़न’ की श्रेणी में आते हैं।
सभी कर्मचारियों को शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, समय सीमा घटना के 3 महीने के भीतर और अधिनियम के तहत मिलने वाले संरक्षण के बारे में बताया जाता है। आंतरिक समिति संस्थान की आंतरिक समिति के सदस्यों को निष्पक्ष जांच करने, साक्ष्य जुटाने और गोपनीयता बनाए रखने के कानूनी तरीकों का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है।
नियोक्ता को नियमित अंतराल पर कार्यशालाएं आयोजित करनी होती हैं। यदि कोई कंपनी पोश प्रशिक्षण आयोजित करने में विफल रहती है या आंतरिक समिति का गठन नहीं करती, तो उस पर ₹50,000 तक का जुर्माना लग सकता है और बार-बार उल्लंघन करने पर व्यापार लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। उप विकास आयुक्त श्री सुमित कुमार ने बताया कि महिलाओं को अधिकार के साथ कर्तव्य और संघर्ष के साथ सहयोग की भावना लेकर काम करें निश्चिंत रूप से आगे बढ़ेगी और सशक्त होगी।

मौके पर डॉ रूपा, मुखिया जुली, जिला मिशन समन्वयक प्रशांत कुमार, जिला परियोजना प्रबंधक डॉ मनोज कुमार सिन्हा,निजी विद्यालय के शिक्षक रंजन कुमार, धर्मेंद्र कुमार, प्रिया चतुर्वेदी,सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, महिला एवं बाल विकास निगम के कर्मी सहित कई अन्य निजी संस्थान के कर्मी मौजूद रहे। जिला प्रोग्राम पदाधिकारी आईसीडीएस सह नोडल पदाधिकारी मिशन शक्ति बंदना पाण्डेय के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का समापन किया गया।

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