एटा:- जनपद में सरकारी रोडवेज व्यवस्था पर प्राइवेट बस माफिया पूरी तरह हावी होता जा रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि रोडवेज बस स्टैंड से ही रोडवेज रंग में रंगी प्राइवेट बसें खुलेआम सवारियां भर रही हैं, और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल में पुलिस प्रशासन, यातायात विभाग और कुछ रोडवेज कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से इन प्राइवेट बसों को खुली छूट मिल रही है। नतीजतन, रोडवेज बसें खाली दौड़ रही हैं और विभाग को रोज़ाना लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये प्राइवेट बसें न केवल रोडवेज का रंग और पहचान अपनाकर यात्रियों को गुमराह कर रही हैं, बल्कि बस स्टैंड परिसर से ही सवारियां उठा रही हैं। नियम-कायदों को ताक पर रखकर यह खेल बेखौफ जारी है।
यात्रियों ने बताया कि प्राइवेट बस चालक मनमाना किराया वसूलते हैं, न तो समय का पालन होता है और न ही सुरक्षा मानकों का। कई बार शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाती है।
क्या रोडवेज विभाग और प्रशासन की मिलीभगत के बिना यह संभव है? अगर नहीं, तो सम्बन्धित अधिकारी अंधे,गूंगे और बहरे बने क्यों बैठे हैं।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह अवैध बस माफिया और भी बेलगाम हो जाएगा और किसी बड़े हादसे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
