श्रीदेवी, खुशवंत सिंह और संत हरद्वारी लाल: ज़िंदगी परमात्मा के हाथ

गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

फिल्मी अदाकारा Sridevi की असामयिक मृत्यु के बाद व्हाट्सऐप पर अनेक संदेश प्रसारित हुए कि वह अपने स्वास्थ्य का अत्यंत ध्यान रखती थीं। बताया गया कि वह प्रतिदिन दो घंटे व्यायाम करती थीं, जंक फूड से परहेज़ करती थीं, फिर भी मात्र 54 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

दूसरी ओर, प्रख्यात लेखक Khushwant Singh का उदाहरण दिया जाता है, जो खुले तौर पर स्वीकार करते थे कि उन्हें व्हिस्की पसंद है और बटर चिकन के शौकीन थे, फिर भी वे 90 वर्ष तक जीवित रहे।

आख़िरकार, जीवन और मृत्यु परमात्मा के हाथ में है। इसी संदर्भ में संत हरद्वारी लाल का एक प्रसंग याद आता है। नई पीढ़ी के युवाओं को बता दें कि संत के नाम से प्रसिद्ध हरद्वारी लाल विधायक, सांसद और Maharshi Dayanand University के कुलपति भी रहे। उन्होंने हरियाणा की राजनीति के दिग्गज नेताओं—Devi Lal, Bhajan Lal और Bansi Lal—से भी बेबाक अंदाज में मतभेद किए। उनके अनेक किस्से हरियाणा की राजनीति पर लिखी मेरी पुस्तक “गुस्ताखी माफ हरियाणा” में दर्ज हैं। खुशवंत सिंह भी उनके प्रशंसकों में शामिल थे।

एक दिन विश्वविद्यालय परिसर में सुबह की सैर के दौरान एक डॉक्टर मित्र ने संत जी को सलाह दी कि अधिक व्हिस्की सेहत के लिए हानिकारक होती है। इस पर संत जी ने मुस्कराते हुए जवाब दिया—“फलां डॉक्टर शराब नहीं पीता था, फिर भी जल्दी चल बसा। और मैं तो अभी कई साल जिंदा रहूंगा।”

यह प्रसंग यही संकेत देता है कि जीवन की डोर अंततः परमात्मा के हाथ में है। इसे केवल खान-पान या शराब से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

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