गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल-
“आज मैं बिन पिए टल्ली”
हरियाणा विधानसभा में एचपीएससी चेयरमैन आलोक वर्मा से जुड़ी हमारी खबर की गूंज सुनाई दी। विधायक रघुबीर कादियान ने सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि हरियाणा के युवाओं को इस ‘काम रोको प्रस्ताव’ के माध्यम से जो संदेश मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल पाया।
उन्होंने सवाल उठाया—क्यों नहीं मिला?
विधायक ने कहा कि जैसा कि बत्रा साहब ने कहा, HPSC (हरियाणा लोक सेवा आयोग) एक स्वायत्त निकाय (Autonomous Body) है। इसके चेयरमैन को संवैधानिक सुरक्षा (Constitutional Protection) प्राप्त होती है। लेकिन ऐसे हालातों में, जब उनकी सत्यनिष्ठा (Integrity) पर सवाल उठ रहे हैं और उनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, तो यह विषय अत्यंत गंभीर हो जाता है।
उन्होंने कहा कि वे सदन के माध्यम से एक महत्वपूर्ण विषय रखना चाहते हैं और उनके पास इसके प्रमाण भी हैं।
विधायक रघुबीर कादियान ने कहा कि ‘गुस्ताखी माफ हरियाणा’ नाम का एक चैनल है, जिसे जाने-माने पत्रकार पवन कुमार बंसल चलाते हैं। मुख्यमंत्री भी उन्हें जानते हैं।
कादियान ने सदन में कहा कि उस चैनल में आरोप लगाया गया है कि Alok Verma (IFS, HR-89), जो पर्यावरण मंत्रालय से प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर NCERT गए थे, वहां खरीदारी और मैनपावर से संबंधित कथित घोटाले हुए। इन आरोपों के चलते उन्हें वहां से हटाकर वापस भेजा गया।
उन्होंने आगे कहा कि इस मामले को NCERT ने Central Vigilance Commission (CVC) को भेजा। CVC देश की एक प्रमुख सतर्कता संस्था है। CVC ने इस पर उनका पक्ष मांगा, लेकिन जानकारी के अनुसार छह रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद उनका पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।
इसके बाद Ministry of Home Affairs (MHA) ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से उनका स्पष्टीकरण मांगने को कहा। एस.एस. संधू, जो CVO के अतिरिक्त सचिव बताए जाते हैं, ने भी पत्र लिखकर पूछा कि कथित भ्रष्टाचार क्या था, कितने घोटाले हुए और किस प्रकार की अनियमितताएं हुईं।
विधायक के अनुसार, इन सवालों का भी कोई जवाब नहीं आया।
इस मुद्दे के विधानसभा में उठने के बाद हरियाणा के युवाओं और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब देखना यह है कि सरकार इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाती है और आगे क्या कार्रवाई होती है।
