प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ने पटना में धूमधाम से मनाया 90वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती समारोह
- रिपोर्ट: प्रेम सिन्हा
पटना, फरवरी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा शनिवार को पटना में 90वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती समारोह बड़े उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं शिव ध्वजारोहण के साथ हुई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व डीजीपी एस.के. भारद्वाज ने समाज में सकारात्मक योगदान के लिए ब्रह्माकुमारी संस्था की सराहना की। वहीं भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी उदय कुमार सिंह ने कहा कि सनातन संस्कृति के सभी पर्व और त्योहारों को जीवित रखने में ब्रह्माकुमारी संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी पटना सब जोन की प्रभारी बीके संगीता ने कहा कि वर्ष के 365 दिनों में कोई न कोई उत्सव होता है। उन्होंने पर्व और त्योहार के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि त्योहार का संबंध उत्सव से है, जबकि पर्व विधि-विधान के साथ मनाया जाता है। उन्होंने कर्म के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार ही जीवन में फल प्राप्त होता है। परम् पिता शिव कल्याणकारी हैं और वे मनुष्य को जीवन के सारगर्भित अर्थ बताते हैं। स्वार्थ और बुराइयों से ऊपर उठकर किया गया कर्म ही मनुष्य को पुण्य का भागी बनाता है। उन्होंने कहा कि हर मनुष्य के अंदर देवत्व छिपा होता है और अपने श्रेष्ठ आचरण से वह इसे प्राप्त कर सकता है।
बीके ज्योति ने अपने संबोधन में कहा कि शिव सुख, शांति, आनंद और करुणा के सागर हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव को प्रसन्न करने के लिए मनुष्य को अपने भीतर की बुराइयों का त्याग करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजय कुमार, राष्ट्रीय जनता दल की नेता मधु मंजूरी, समाजसेवी श्रीमती प्रिया सिंह, प्रेम सिंह, जनता दल (यूनाइटेड) की प्रदेश महासचिव निखिता तिवारी, सिटीजन ग्रुप के एमडी चंदन कुमार, समाजसेवी विनय पाठक, बीके अनीता, संजय कुमार, नीरज कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि ब्रह्माकुमारी संस्था की शिक्षा में राजयोग ध्यान पर विशेष बल दिया जाता है। इसके अनुसार परमात्मा को सर्वशक्तियों का स्रोत माना गया है। राजयोग के माध्यम से परखने, समेटने, विस्तार, सहयोग, निर्णय, सामना और सहने जैसी शक्तियों का विकास होता है, जिससे मनुष्य काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या और आलस्य पर नियंत्रण प्राप्त कर सकता है। शिव की महिमा अपरंपार है और ‘ॐ नमः शिवाय’ तथा ‘ओम शांति’ जीवन के मूल मंत्र माने जाते हैं।
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