खाटू श्याम: क्यों कहलाते हैं हारे का सहारा और तीन बाण धारी, जानिए महाभारत से जुड़ी पूरी कथा

सीकर (राजस्थान)।राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम बाबा का मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खाटू श्याम बाबा के दर्शन मात्र से ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। बाबा को “हारे का सहारा” कहा जाता है, क्योंकि जब इंसान जीवन की परेशानियों से हार मान लेता है, तब खाटू श्याम की शरण में जाकर उसे नई आशा और संबल मिलता है। मान्यता है कि बाबा कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करते और कोई भी श्रद्धालु उनके दरबार से खाली हाथ नहीं लौटता।

खाटू श्याम को कलियुग का भगवान भी माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि जिस पर बाबा का आशीर्वाद हो जाए, उसके जीवन की बाधाएं स्वतः दूर होने लगती हैं। बाबा को हारे का सहारा ही नहीं, बल्कि “तीन बाण धारी” और “शीश दानी” के नाम से भी जाना जाता है। इसके पीछे महाभारत काल से जुड़ी एक पौराणिक कथा है।

महाभारत और पांडवों से जुड़ा है खाटू श्याम का संबंध
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार खाटू श्याम बाबा का वास्तविक नाम बर्बरीक था। वे पांडव पुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। महाभारत युद्ध के समय बर्बरीक अत्यंत शक्तिशाली योद्धा थे। उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि युद्ध में वे हमेशा कमजोर पक्ष का साथ देंगे। उस समय युद्ध में कौरवों की स्थिति कमजोर होती जा रही थी।

भगवान श्रीकृष्ण को बर्बरीक की अपार शक्ति का आभास हो गया था। उन्हें ज्ञात था कि यदि बर्बरीक युद्ध में उतर गए तो युद्ध का संतुलन बिगड़ जाएगा। इसी कारण श्रीकृष्ण ने छलपूर्वक बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने भी बिना किसी संकोच के अपना शीश दान कर दिया। इसी कारण वे “शीश दानी” कहलाए।

क्यों कहलाते हैं तीन बाण धारी?
पौराणिक कथाओं के अनुसार बर्बरीक को भगवान शिव से तीन अभेद्य बाणों का वरदान प्राप्त था। इन तीन बाणों की विशेषता यह थी कि वे पूरे शत्रु दल का विनाश कर पुनः उनके तरकश में लौट आते थे। माना जाता है कि इन तीन बाणों के बल पर बर्बरीक अकेले ही युद्ध का रुख बदल सकते थे और हारते हुए पक्ष को जीत दिला सकते थे। इन्हीं तीन दिव्य बाणों के कारण उन्हें “तीन बाण धारी” कहा जाता है।

कलियुग में खाटू श्याम के रूप में पूजे गए
बर्बरीक की भक्ति, त्याग और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे स्वयं श्रीकृष्ण के स्वरूप में “खाटू श्याम” के नाम से पूजे जाएंगे। तभी से खाटू श्याम बाबा को कलियुग का भगवान माना जाता है और उनके दरबार में श्रद्धालुओं की आस्था दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।

आज भी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से खाटू श्याम बाबा का स्मरण करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है।

 

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डिस्क्लेमर- यहां दी गई जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। khabrejunction.com इनकी पुष्टि नहीं करता।

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