राजीव लोंगोवाल समझौते के विरोध में देवीलाल का “ न्याय युद्ध आंदोलन “ क्या वाकई ही हरियाणा के हित में था ? इस नाजुक इशू पर पाठको के विचार आमंत्रित हैं
गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
एसवाईएल नहर इशू पर नायब सैनी और भगवंत मान की भेंट।
चार दशक से एसवाईएल नहर का मामला लटका हुआ है। चंडीगढ़ का मामला भी आज तक अधर में है। सवाल यह है कि आखिर ये मुद्दे क्यों लटके हुए हैं?
स्वर्गीय राजीव गांधी ने संत लोंगोवाल से एक समझौता किया था, जिसे राजीव–लोंगोवाल समझौता कहा जाता है। हरियाणा के नेता देवीलाल ने इस समझौते को हरियाणा विरोधी बताते हुए “न्याय युद्ध आंदोलन” छेड़ दिया। परिणामस्वरूप यह समझौता ठप हो गया और देवीलाल मुख्यमंत्री बन गए।
जानकारों का कहना है कि यदि देवीलाल इसका विरोध न करते और यह समझौता लागू हो जाता, तो हरियाणा को न केवल पानी मिलता बल्कि अलग राजधानी भी मिल जाती। हालांकि यह आज भी बहस का विषय है।
उस समय के सभी नेताओं और पत्रकार साथियों से अपील है कि वे इस नाजुक और जनहित से जुड़े मामले पर अपनी राय दें। यदि वे चाहें तो उनकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
आखिर कब तक जनहित से जुड़े ऐसे अहम मामलों पर राजनीति होती रहेगी?
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