गुस्ताखी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
काफ़ी पहले रोहतक के पूर्व मंत्री सेठ श्रीकृष्ण दास को समाज सेवा के लिए पद्मश्री अवार्ड मिला था। वे बंसी लाल के क़रीबी थे। एक पत्रकार ने जब इस बारे में बंसी लाल से पूछा तो उन्होंने जवाब दिया—“मैंने इंदिरा जी (प्रधानमंत्री) से कह दिया और अवार्ड मिल गया।”
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बंसी लाल ने बताया कि वे अंग्रेज़ी अख़बार The Tribune के तत्कालीन संपादक को पद्मश्री अवार्ड नहीं दिलवा सके, इसलिए वे नाराज़ हो गए। बता दें कि The Tribune अख़बार और बंसी लाल के बीच छत्तीस का आँकड़ा था।
बंसी लाल ने बताया कि उन्होंने तो बहन जी (इंदिरा गांधी) से कह दिया था, लेकिन तब तक प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। बकौल बंसी लाल, उन्होंने संपादक जी को अगले साल अवार्ड दिलाने का वायदा भी किया था। बंसी लाल ने कहा—
“जब मैंने बहन जी से कहकर अपने वर्कर सेठ श्रीकृष्ण दास को पद्मश्री अवार्ड दिलवा दिया, तो मुझे The Tribune अख़बार के संपादक को दिलाने में क्या दिक़्क़त थी?”
बकौल शायर—
“नाच गा रहे हैं बगुले और कव्वे,
ग़मगीन हैं यहाँ पर हंस और मोर।
बुलबुलों के घोंसलों में हैं उल्लू,
मूर्खता के हाथ में है बुद्धि की बागडोर!!”
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