IVF से जुड़ी गलतफहमियां दूर: क्या 9 महीने बेड रेस्ट जरूरी है? डॉक्टर ने दिए अहम जवाब

आज के समय में कई महिलाएं मां बनने के लिए IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) का सहारा ले रही हैं। हालांकि, IVF को लेकर समाज में आज भी कई तरह की गलत धारणाएं फैली हुई हैं। इन्हीं सवालों और शंकाओं को लेकर हमने डॉ. काजल सिंह (एसोसिएट प्रोफेसर, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, ग्रेटर नोएडा) से बातचीत की।

डॉ. काजल सिंह बताती हैं कि IVF कोई असामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय इलाज है। इसमें महिला के अंडे और पुरुष के स्पर्म को शरीर के बाहर मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है और फिर उसे महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। यह तरीका उन दंपतियों के लिए कारगर होता है, जिन्हें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण में कठिनाई होती है।

क्या IVF में पूरे 9 महीने बेड रेस्ट जरूरी है?

डॉ. काजल सिंह के अनुसार, यह धारणा बिल्कुल गलत है। IVF के बाद पूरे 9 महीने बिस्तर पर लेटे रहने की जरूरत नहीं होती। भ्रूण ट्रांसफर के बाद आमतौर पर डॉक्टर 1 से 2 दिन आराम की सलाह देते हैं। इसके बाद महिला धीरे-धीरे अपनी सामान्य दिनचर्या जैसे हल्का चलना, घर का काम या ऑफिस का हल्का कार्य कर सकती है। जरूरत से ज्यादा बेड रेस्ट करने से शरीर कमजोर हो सकता है और मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है। हां, किसी विशेष समस्या की स्थिति में डॉक्टर अतिरिक्त आराम की सलाह दे सकते हैं।

क्या IVF में बहुत ज्यादा इंजेक्शन लगते हैं?

IVF प्रक्रिया में इंजेक्शन जरूर लगते हैं, लेकिन जितना डराया जाता है, उतने ज्यादा नहीं होते। ये इंजेक्शन अंडों के अच्छे विकास के लिए दिए जाते हैं और कुछ दिनों तक रोज छोटे-छोटे इंजेक्शन लगते हैं। ये ज्यादा दर्दनाक नहीं होते और कई महिलाएं इन्हें घर पर ही लगवा लेती हैं। इंजेक्शन की संख्या महिला की स्थिति पर निर्भर करती है।

IVF के बाद किन सावधानियों का रखें ध्यान?

IVF के बाद संतुलित आहार, पूरी नींद और हल्की एक्सरसाइज बेहद जरूरी होती है। रोजाना थोड़ा टहलना फायदेमंद रहता है। भारी काम, वजन उठाना, धूम्रपान और शराब से पूरी तरह बचना चाहिए। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं समय पर लेना जरूरी है।

तनाव कम रखना क्यों है जरूरी?

IVF के दौरान चिंता होना स्वाभाविक है, लेकिन जरूरत से ज्यादा तनाव नुकसानदायक हो सकता है। परिवार का सहयोग, सकारात्मक सोच और डॉक्टर से खुलकर बातचीत करना इस दौरान बहुत मददगार साबित होता है। डॉक्टरों का कहना है कि IVF कोई बीमारी नहीं, बल्कि इलाज का एक तरीका है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सही जानकारी और डॉक्टर की सलाह से IVF के जरिए स्वस्थ गर्भधारण संभव है। किसी भी भ्रम या डर की स्थिति में खुद से फैसला लेने के बजाय हमेशा विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।

 

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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें

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